NEWS CHOICE

निष्पक्ष खबर, बेबाक अंदाज

लद्दाख हिंसा और सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी पर सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख

केंद्र, लद्दाख प्रशासन और जोधपुर जेल को भेजा नोटिस, पत्नी की याचिका पर मांगा जवाब

नई दिल्ली/06/10/2025

law

लद्दाख में हाल ही में हुई हिंसा और जलवायु कार्यकर्ता व शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी को लेकर अब सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और लद्दाख प्रशासन से जवाब मांगा है। अदालत ने सोमवार को सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. अंगमो द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र, लद्दाख प्रशासन और जोधपुर जेल को नोटिस जारी किया है। इस याचिका में वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत हिरासत में लिए जाने को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में कहा है कि उनके पति को गैरकानूनी तरीके से हिरासत में लिया गया है और उन्हें हिरासत आदेश की प्रति तक नहीं दी गई है, जो कि नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।

सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही:

यह मामला न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया की पीठ के समक्ष आया। सुनवाई के दौरान, वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और विवेक तन्खा ने याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी की, जबकि केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता उपस्थित हुए। सिब्बल ने अदालत को बताया कि उनकी मुवक्किल को अब तक हिरासत के आधार नहीं बताए गए हैं और जब तक हिरासत आदेश की प्रति नहीं दी जाती, तब तक वह सरकार के समक्ष कोई औपचारिक आपत्ति दर्ज नहीं करा सकतीं। इस पर तुषार मेहता ने कहा कि हिरासत आदेश बंदी को उपलब्ध करा दिया गया है और यदि कोई गोपनीयता का प्रश्न नहीं है, तो आदेश की प्रति पत्नी को भी दी जा सकती है।

पीठ ने केंद्र से यह सवाल पूछा कि “बंदी की पत्नी को आदेश देने में आखिर क्या बाधा है?” इस पर मेहता ने जवाब दिया कि इसमें कोई बाधा नहीं है, लेकिन वह इस पर जांच करेंगे ताकि हिरासत आदेश की वैधता पर कोई नया विवाद खड़ा न हो। न्यायमूर्ति अरविंद कुमार ने कहा कि यह अदालत चाहती है कि बंदी के परिवार को उसके अधिकारों के बारे में पूरी जानकारी दी जाए, ताकि किसी भी प्रकार की कानूनी असमानता न रहे। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई अगले मंगलवार के लिए तय की है।


हिरासत और स्वास्थ्य से जुड़ी चिंता:

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने अदालत का ध्यान वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति की ओर दिलाया और कहा कि हिरासत में लिए जाने से पहले वह उपवास पर थे और उन्हें नियमित रूप से दवाइयों की आवश्यकता रहती है। इस पर तुषार मेहता ने कहा कि हिरासत में लेने के बाद उन्हें चिकित्सक के समक्ष प्रस्तुत किया गया था और उन्होंने स्वयं कहा कि उन्हें फिलहाल किसी दवा की आवश्यकता नहीं है। इसके बावजूद, अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए कि वांगचुक को उनकी शारीरिक स्थिति के अनुरूप चिकित्सा सुविधा दी जाए और जेल प्रशासन यह सुनिश्चित करे कि उन्हें सभी आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध हों।


पत्नी से मुलाकात का मुद्दा:


याचिकाकर्ता गीतांजलि अंगमो ने यह भी कहा कि उन्हें अपने पति से व्यक्तिगत रूप से मिलने की अनुमति नहीं दी गई। उन्होंने बताया कि अब तक उन्हें केवल इंटरकॉम के माध्यम से ही बात करने की अनुमति दी गई है। इस पर कपिल सिब्बल ने कहा कि यह किसी भी प्रकार से उचित नहीं है और उन्हें अपने पति से सीधे मिलने दिया जाना चाहिए। तुषार मेहता ने जवाब में कहा कि बंदी के वकील और भाई पहले ही जेल में उनसे मिल चुके हैं। इस पर अदालत ने कहा कि यदि कोई सुरक्षा या कानूनी बाधा नहीं है, तो पत्नी को भी व्यक्तिगत मुलाकात की अनुमति दी जाए।

लद्दाख में हिंसा और एनएसए का मामला:


बता दें कि 26 सितंबर को सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत गिरफ्तार किया गया था। यह कार्रवाई लद्दाख में हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद की गई थी, जिनमें 5 लोगों की मौत और 90 लोग घायल हुए थे। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें थीं —

1. लद्दाख को राज्य का दर्जा दिया जाए।

2. क्षेत्र को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल किया जाए ताकि स्थानीय आदिवासी समुदायों को संवैधानिक अधिकार और सुरक्षा मिल सके।

हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद प्रशासन ने सोनम वांगचुक को “जन व्यवस्था भंग करने” और “उकसाने” के आरोपों में हिरासत में लिया और उन्हें राजस्थान की जोधपुर सेंट्रल जेल में स्थानांतरित कर दिया गया।

याचिका की मुख्य बातें:


गीतांजलि अंगमो ने अपने वकील सर्वम रितम खरे के माध्यम से दायर याचिका में कहा कि —

उन्हें अब तक हिरासत आदेश की प्रति नहीं दी गई है।

उनका अपने पति से सीधा संपर्क नहीं हुआ है।

एनएसए का दुरुपयोग कर राजनीतिक आवाज़ों को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।

उन्होंने वांगचुक की तत्काल रिहाई और हिरासत की वैधता की जांच की मांग की है।

अंगमो ने यह भी कहा कि लद्दाख प्रशासन ने जो "जासूसी" और "अवैध गतिविधियों" के आरोप लगाए हैं, वे पूरी तरह से झूठे और राजनीतिक रूप से प्रेरित हैं।


सरकार की दलील और सुप्रीम कोर्ट का रुख:

केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वांगचुक के खिलाफ कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि “अनावश्यक रूप से प्रचार नहीं किया जाना चाहिए” क्योंकि हिरासत के सभी आधार बंदी को बताए जा चुके हैं।

हालांकि, अदालत ने इस पर संतोषजनक टिप्पणी नहीं की और कहा कि अगर बंदी को आदेश दिया गया है, तो परिवार को देने में क्या आपत्ति है। अदालत ने कहा कि कानून के तहत पारदर्शिता और मानवीय अधिकारों का सम्मान जरूरी है।

आगे की सुनवाई:

सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों को लिखित जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया है और यह स्पष्ट किया है कि अगली सुनवाई अगले मंगलवार को होगी। अदालत ने यह भी कहा कि जब तक अंतिम निर्णय नहीं आता, वांगचुक के स्वास्थ्य और कानूनी अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

लद्दाख के प्रसिद्ध पर्यावरणविद् और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी और उनके खिलाफ एनएसए का प्रयोग अब राष्ट्रीय बहस का विषय बन चुका है। सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप इस पूरे मामले को एक नए मोड़ पर ले जा रहा है। आगामी सुनवाई में यह तय हो सकता है कि क्या सरकार ने कानून की सीमाओं का उल्लंघन किया या फिर कार्रवाई पूरी तरह वैधानिक थी। फिलहाल, अदालत के नोटिस के बाद केंद्र और लद्दाख प्रशासन पर जवाब देने का दबाव बढ़ गया है।

wangcchuk
Scroll to Top