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नेपाल की पहली महिला पीएम सुशीला कार्की ने Gen-Z आंदोलनकारियों की मांग पूरी की

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नेपाल की कार्यवाहक प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने पद संभालते ही Gen-Z आंदोलनकारियों को खुश करने वाला ऐतिहासिक फैसला लिया है। सुशीला कार्की ने रविवार को सत्ता संभाली और अपने पहले राष्ट्रीय संबोधन में घोषणा की कि Gen-Z आंदोलन के दौरान मारे गए सभी युवाओं को सरकारी रूप से शहीद घोषित किया जाएगा। इसके अलावा, मारे गए युवाओं के परिवारों को 10 लाख नेपाली रुपये की आर्थिक मदद दी जाएगी और घायल प्रदर्शनकारियों व पुलिसकर्मियों का भी चिकित्सा उपचार किया जाएगा।

देश में तीन दिन चले हिंसक Gen-Z विरोध प्रदर्शनों में भारी नुकसान हुआ और 72 लोगों की मौत हुई, जिनमें 59 प्रदर्शनकारी, 10 कैदी और 3 पुलिस अधिकारी शामिल थे। इस आंदोलन के कारण नेपाल में व्यापक हिंसा और लूटपाट हुई, जिसे देश ने पहले कभी नहीं देखा। सुशीला कार्की ने कहा कि इस कठिन समय में सत्ता उनके हाथ आई है, जिसे वे खुशी की बजाय बड़ी जिम्मेदारी मानकर सभी के सहयोग से निभाएँगी।

73 वर्षीय सुशीला कार्की नेपाल की पहली महिला प्रधानमंत्री हैं और वे देश की पूर्व मुख्य न्यायाधीश भी रह चुकी हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार स्थायी नहीं है और केवल छह महीने से एक साल तक देश में नया संसद चुने जाने तक काम करेगी। उन्होंने कहा कि उनका मकसद सत्ता का स्वाद चखना नहीं बल्कि देश को स्थिरता प्रदान करना है, और इसके लिए जनता का सहयोग जरूरी है।

सुशीला कार्की का यह फैसला Gen-Z आंदोलनकारियों के लिए बेहद राहत देने वाला साबित हुआ है और इसे देश भर में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि मंत्रालयें विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुए नुकसान की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करें, ताकि प्रभावित क्षेत्रों को उचित मदद मुहैया कराई जा सके।

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