यासीन मलिक ने कोर्ट में बताया: वाजपेयी, मनमोहन सिंह और डोभाल से हुई सीक्रेट मीटिंग
कश्मीर/19/09/2025
जम्मू-कश्मीर के अलगाववादी नेता यासीन मलिक ने टेरर फंडिंग मामले में दिल्ली हाई कोर्ट में 85 पन्नों का हलफनामा दाखिल किया है, जिसमें उन्होंने दावा किया है कि 1990 के बाद से ही केंद्र सरकार के बड़े अफसर, केंद्रीय मंत्री और विपक्ष के नेता उनसे व्यक्तिगत रूप से मिलते रहे। मलिक ने कहा कि उन्होंने तत्कालीन विपक्ष नेता अटल बिहारी वाजपेयी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से सीक्रेट मीटिंग की।
हलफनामे में यासीन मलिक ने कहा कि 1994 में जेल से रिहाई के बाद उन्होंने कई केंद्रीय मंत्रियों, राज्यपालों, विदेशी राजनयिकों और आईबी अफसरों के साथ बैठक की। उन्होंने यह भी दावा किया कि इंटेलिजेंस ब्यूरो के निर्देश पर उन्होंने पाकिस्तान में लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी हाफिज सईद से मुलाकात की थी। इसके बाद उन्हें प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अनौपचारिक बातचीत के लिए बुलाया और शांति बनाए रखने के लिए धन्यवाद दिया।
मलिक ने यह भी बताया कि 1990 में गिरफ्तारी के बाद उन्हें महरौली स्थित गेस्ट हाउस में रखा गया था, जहां बीएसएफ, आईबी और पुलिस अधिकारियों ने उनसे मुलाकात की। उन्हें प्रधानमंत्री के साथ डिनर का ऑफर भी मिला, जिसे उन्होंने ठुकरा दिया। कुछ महीनों बाद उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें फिर से महरौली लाया गया, जहां तत्कालीन गृह मंत्री राजेश पायलट, दो राज्यपाल और वरिष्ठ अधिकारी उनसे मिले।
1995 में रिहाई के बाद मलिक ने पहली बार अटल बिहारी वाजपेयी से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने वाजपेयी से कहा कि देश ने उन्हें लोकतांत्रिक अधिकार देने का वादा किया, लेकिन सेना उनके लोगों पर कार्रवाई करती है। वाजपेयी ने जवाब में कहा, “कच्चे धागे का ही सही, हमारे साथ कोई न कोई रिश्ता जरूर रखें।” मलिक ने लिखा कि इस जवाब ने उन्हें स्तब्ध कर दिया।
हलफनामे में यह भी उल्लेख है कि 2000-2001 में आईबी अफसर अजीत डोभाल ने मलिक के लिए मीटिंग आयोजित की, जिसमें तत्कालीन पीएम वाजपेयी ने रमजान युद्धविराम के समर्थन का सुझाव दिया। 2006 में पाकिस्तान से लौटने के बाद पीएम मनमोहन सिंह ने उनसे अनौपचारिक बातचीत की। मलिक ने दावा किया कि यह सिलसिला 2019 तक जारी रहा।
मलिक ने कोर्ट को बताया कि इस दौरान उन्हें 32 आतंक से जुड़े मामलों में जमानत मिली। उल्लेखनीय है कि यासीन मलिक को 2022 में एक मामले में आजीवन कारावास की सजा दी जा चुकी है। टेरर फंडिंग मामले की अगली सुनवाई 10 नवंबर को होगी।