जेलेंस्की से मुलाकात के बाद ट्रंप का दावा — भारत अब रूस से तेल नहीं खरीदेगा
वॉशिंगटन/18/10/2025
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर भारत को लेकर चौंकाने वाला बयान दिया है। शुक्रवार को व्हाइट हाउस में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के साथ बैठक के बाद उन्होंने दावा किया कि भारत ने रूस से तेल खरीदना लगभग बंद कर दिया है और जल्द ही इसे पूरी तरह रोक देगा।
ट्रंप ने कहा कि उन्हें भरोसा दिलाया गया है कि भारत अब रूसी तेल पर अपनी निर्भरता खत्म करने की दिशा में “तेजी से आगे बढ़ रहा है।” उनके अनुसार, भारत ने पिछले महीनों में रूस से तेल खरीद 38 प्रतिशत तक घटाई है, और यह कदम यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने में “सकारात्मक बदलाव” लाएगा। ट्रंप ने यहां तक कहा कि “अगर भारत रूस से तेल नहीं खरीदेगा तो संघर्ष को खत्म करना आसान हो जाएगा।”
विदेश मंत्रालय ने ट्रंप के बयान को बताया बेबुनियाद
ट्रंप के इस दावे पर भारत ने तुरंत प्रतिक्रिया दी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साफ कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच किसी तरह की टेलीफोनिक बातचीत नहीं हुई है।
उन्होंने मीडिया ब्रीफिंग में कहा,
“ऊर्जा के मुद्दे पर हमारा रुख पहले से स्पष्ट है। इस पर अमेरिका की हालिया टिप्पणियों को लेकर हमने पहले ही बयान जारी कर दिया था। प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच कोई नई बातचीत नहीं हुई है।”
भारत ने यह भी दोहराया कि उसकी ऊर्जा नीति राष्ट्रीय हितों के अनुरूप है और वह तेल आयात के स्रोतों में विविधता लाने की दिशा में लगातार काम कर रहा है।
ट्रंप बोले — मोदी महान नेता, भारत अविश्वसनीय देश
हालांकि, अपने बयान में ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ भी की। उन्होंने कहा, “नरेंद्र मोदी एक महान व्यक्ति हैं और भारत एक अविश्वसनीय देश है।”
ट्रंप का कहना था कि भारत और अमेरिका के बीच ऊर्जा और व्यापारिक साझेदारी लगातार मज़बूत हो रही है।
लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता का नया दौर वाशिंगटन में चल रहा है, और इस तरह की टिप्पणी से बातचीत के माहौल पर असर पड़ सकता है।
भारत-अमेरिका के बीच ऊर्जा समझौते पर बातचीत जारी
भारत के वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, देश अपनी रिफाइनरी प्रणाली में किसी बड़े बदलाव के बिना अमेरिका से 12 से 13 अरब डॉलर मूल्य का अतिरिक्त कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस आयात करने पर विचार कर रहा है।
भारत सरकार का कहना है कि वह अपने ऊर्जा स्रोतों को विविध बनाना चाहती है, बशर्ते यह “सही मूल्य” पर उपलब्ध हो।
ट्रंप प्रशासन ने इससे पहले अगस्त में रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाया था, जबकि चीन के खिलाफ ऐसी कोई कार्रवाई नहीं की गई। इस फैसले पर नई दिल्ली ने पहले ही अपनी नाराज़गी जाहिर की थी।
राजनयिक समीकरणों के बीच नया विवाद
ट्रंप का यह बयान ऐसे वक्त आया है जब हाल ही में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से मुलाकात की थी।
दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को लेकर सकारात्मक संकेतों के बावजूद ट्रंप की यह टिप्पणी एक बार फिर ऊर्जा नीति को लेकर राजनयिक बहस को हवा दे रही है।