शिमला में शोषण के खिलाफ एकजुट हुआ दलित समाज — ‘शोषण मुक्ति मंच’ के बैनर तले सामाजिक न्याय की नई हुंकार
शिमला/16/10/2025
राजधानी शिमला के ऐतिहासिक काली बाड़ी सभागार में गुरुवार को हिमाचल प्रदेश के संयुक्त अनुसूचित जाति संगठनों का राज्यस्तरीय अधिवेशन ऐतिहासिक रूप से सम्पन्न हुआ। इस अधिवेशन में प्रदेशभर से 35 संगठनों के करीब 400 प्रतिनिधियों ने भाग लिया और जातिगत उत्पीड़न, सामाजिक भेदभाव व अन्याय के खिलाफ एकजुट होकर संघर्ष छेड़ने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता विभिन्न संगठनों के वरिष्ठ नेतृत्व ने संयुक्त रूप से की, जबकि संचालन जगत राम ने किया। अधिवेशन में विशेष रूप से पूर्व विधायक एवं हिमाचल किसान सभा के राज्य सचिव राकेश सिंघा और पूर्व महापौर संजय चौहान उपस्थित रहे, जिन्होंने समाज की एकता को समय की आवश्यकता बताया।
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि अब प्रदेश के सभी अनुसूचित जाति संगठन ‘शोषण मुक्ति मंच’ के साझा बैनर तले एकजुट होकर सामाजिक न्याय की लड़ाई लड़ेंगे। यह मंच पूरे हिमाचल में जातिगत अत्याचार, भेदभाव और वंचना के खिलाफ एक संगठित आंदोलन को दिशा देगा।
अधिवेशन में 35 सदस्यीय राज्य कमेटी का गठन भी किया गया। इसमें आशीष कुमार को सर्वसम्मति से राज्य संयोजक, जबकि राजेश कोष और मिन्टा जिंटा को सह संयोजक चुना गया। नई टीम को सामाजिक समानता की लड़ाई का अग्रदूत माना जा रहा है।
‘शोषण मुक्ति मंच’ ने हाल ही में रोहड़ू और कुल्लू सैंज में हुई जातिगत हिंसा की घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त की। मंच ने पीड़ित सिकंदर के परिवार को सरकारी नौकरी और उचित मुआवजा देने की माँग की। इस दौरान किसान, मजदूर और महिला संगठनों ने भी मंच के साथ खड़े होकर साझा संघर्ष में पूर्ण सहयोग देने का संकल्प लिया।
राज्य संयोजक आशीष कुमार ने कहा कि
“यह मंच सिर्फ किसी एक वर्ग की नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति की आवाज़ है जो समानता और न्याय में विश्वास रखता है। 15 नवंबर तक प्रदेश के सभी जिलों में अधिवेशन आयोजित किए जाएंगे और 17 नवंबर को ‘शोषण मुक्ति मंच’ के बैनर तले प्रदेशव्यापी प्रदर्शन किए जाएंगे।”
इस अधिवेशन ने हिमाचल प्रदेश में दलित समाज की एकता और आत्मसम्मान की लड़ाई को नई दिशा दी है। ‘शोषण मुक्ति मंच’ अब न केवल एक संगठन, बल्कि सामाजिक बदलाव की एक सशक्त आवाज़ बनकर उभरा है — जो आने वाले दिनों में न्याय और समानता की दिशा में निर्णायक भूमिका निभाएगा।