सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: नाबालिगों की संपत्ति पर अभिभावक का फैसला अब नहीं चलेगा
नई दिल्ली/24/10/2025
नई दिल्ली: देश की सर्वोच्च अदालत ने नाबालिगों की संपत्ति के मामलों में एक अहम निर्णय सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि माता-पिता या अभिभावक बिना कोर्ट की अनुमति के किसी नाबालिग की संपत्ति बेच देते हैं, तो नाबालिग बालिग होने के बाद उस सौदे को रद्द कर सकता है। इसके लिए नाबालिग को अलग से कोई मुकदमा दर्ज कराने की आवश्यकता नहीं होगी; उसका स्पष्ट व्यवहार भी कानूनी रूप से वैध माना जाएगा।
फैसला 7 अक्टूबर को सुनाया गया, जिसमें न्यायमूर्ति पंकज मिथल और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी वराले की पीठ ने केएस शिवप्पा बनाम श्रीमती नीलाम्मा मामले में यह महत्वपूर्ण निर्देश दिए। कोर्ट ने कहा कि नाबालिग बालिग होने के बाद अपने अभिभावक द्वारा किए गए लेन-देन को अस्वीकार करने का अधिकार रखता है, चाहे वह मुकदमा दायर करके करे या स्पष्ट व्यवहार से।
यह विवाद कर्नाटक के दावणगेरे जिले के शामनूर गांव से जुड़ा था। रुद्रप्पा नामक व्यक्ति ने 1971 में अपने तीन नाबालिग बेटों के नाम दो भूखंड खरीदे। बिना कोर्ट की अनुमति के उसने ये भूखंड तीसरे पक्ष को बेच दिए। नाबालिगों के वयस्क होने पर उन्होंने अपने अधिकार का प्रयोग करते हुए संपत्ति को रद्द करने का कदम उठाया। नाबालिगों की इस कार्रवाई को ट्रायल कोर्ट ने मान्यता दी, लेकिन उच्च न्यायालय ने पहले इसे पलट दिया था। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट तक गया।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कानून स्पष्ट है—नाबालिग की संपत्ति के किसी भी हिस्से को अभिभावक बिना अनुमति के बेच नहीं सकता। ऐसा कोई भी लेन-देन नाबालिग के अधिकार में शून्यकरणीय माना जाएगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि बालिग होने के बाद नाबालिग उस लेन-देन को रद्द करने के लिए स्पष्ट और असंदिग्ध आचरण कर सकता है, जैसे कि उसी संपत्ति की नई बिक्री करना।
इस फैसले से नाबालिगों की संपत्ति पर अभिभावकों की मनमानी रोकने में मदद मिलेगी और बालिग होने के बाद उनके अधिकार सुरक्षित रहेंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला नाबालिगों के हित में कानूनी सुरक्षा का नया मानक स्थापित करता है।