जब सुक्खू सरकार चुप रही, तब चंद्रमोहन शर्मा ने अपने खर्चे से खोलीं 30 बंद सड़कें,ग्रामीण बोले— यही असली जनप्रतिनिधि
मंडी/03/11/2025
हिमाचल प्रदेश में मॉनसून के दौरान बंद हुईं कई संपर्क सड़कें आज तक बहाल नहीं हो पाई थीं। विभाग और सरकार की ओर से बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, जिससे ग्रामीण महीनों से परेशान थे। लेकिन सरकाघाट विधानसभा क्षेत्र में जिला परिषद सदस्य और भाजपा नेता चंद्रमोहन शर्मा ने वह कर दिखाया, जो सरकारी तंत्र नहीं कर सका।
सरकार की चुप्पी और सिस्टम की सुस्ती के बीच चंद्रमोहन शर्मा ने अपना पैसा और जनसहयोग लगाकर 30 बंद पड़ी सड़कों को यातायात के लिए खोल दिया। यह पहल सोशल मीडिया पर वायरल हो गई और लोग अब उन्हें "बुलडोजर भाई" कहकर संबोधित कर रहे हैं।
ग्रामीणों की गुहार पर तुरंत एक्शन
बरसात के दौरान भारी मलबा और भूस्खलन के कारण सरकाघाट क्षेत्र की कई सड़कें बंद पड़ी थीं। बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे थे, खेतों तक पहुँचना मुश्किल था और बीमार पड़ने पर मरीजों को अस्पताल तक ले जाना भी चुनौती बन गया था। ग्रामीणों ने कई बार विभागीय अधिकारियों और सरकार तक बात पहुँचाने की कोशिश की, लेकिन नतीजा—सिर्फ आश्वासन, कोई कार्रवाई नहीं।
आख़िरकार, पंचायत प्रतिनिधियों ने अपनी समस्या चंद्रमोहन शर्मा के सामने रखी। उन्होंने बिना देरी किए खुद फंडिंग की, मशीनें मंगवाई और अभियान शुरू किया। कई JCB ऑपरेटरों ने सिर्फ तेल खर्च पर काम करने की सहमति देकर इस मिशन को सहयोग दिया।
कहाँ-कहाँ खोली गई सड़कें?
चंद्रमोहन शर्मा की पहल से बहाल हुईं सड़कों में शामिल हैं:
ग्राम पंचायत गेहरा क्षेत्र: गेहरा–कुफ्रू–डवरोग, जनीहण रोड–डमैहर, जालपा माता मंदिर–लंगस
पंचायत टिक्कर क्षेत्र: टिक्कर–सदोह, खील–अप्पर सदोह, लोअर सदोह–अप्पर सदोह
ग्राम पंचायत पिंगला, चहलोग, गौंटा, भरनाल और खलारड्ड की कई लिंक सड़कें
इन 30 मार्गों के खुलने से सैकड़ों ग्रामीणों को राहत मिली है और रोजमर्रा की गतिविधियाँ सुचारू रूप से चलने लगी हैं।
“जनता से बड़ा कोई आदेश नहीं”— चंद्रमोहन शर्मा
काम पूरा होने के बाद चंद्रमोहन शर्मा ने कहा:
“जब विभागों और सरकार से समाधान नहीं मिल रहा था, तब जनता का दर्द देख कर मैं चुप नहीं रह सकता था। जनता ने मुझे चुना है, और उनकी तकलीफ में सामने आना मेरा दायित्व है।”
उन्होंने इस अभियान में शामिल मशीन ऑपरेटरों और सहयोग करने वाले ग्रामीणों का भी धन्यवाद किया।
ग्रामीणों की भावुक प्रतिक्रिया
ग्रामीणों ने कहा:
“सरकार ने सिर्फ वादे किए, लेकिन सड़कें ‘बुलडोजर भाई’ ने खुलवाईं। हमारे लिए यही असली जनप्रतिनिधि हैं।”
लोग अब उन अधूरी पड़ी सड़क परियोजनाओं के लिए भी चंद्रमोहन शर्मा की तरफ उम्मीद से देख रहे हैं।
सरकाघाट में यह अनोखी पहल इस बात का उदाहरण बन गई है कि जिम्मेदारी और इच्छाशक्ति हो तो एक अकेला जनप्रतिनिधि भी बड़े बदलाव ला सकता है। जहाँ सरकारी मशीनरी ठहर जाती है, वहाँ कभी-कभी जनसेवा ही सबसे बड़ा समाधान बन जाती है।