जयराम ठाकुर का आरोप: अधिकारियों के चंगुल में फंस गई है सरकार, मुख्यमंत्री बन गए कठपुतली
शिमला/04/10/2025
शिमला। हिमाचल प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सुक्खू सरकार पर बड़ा हमला बोलते हुए कहा कि मौजूदा सरकार पूरी तरह से अधिकारियों के चंगुल में फंस चुकी है। मुख्यमंत्री खुद अधिकारियों की कठपुतली बनकर रह गए हैं और पूरे प्रदेश की व्यवस्था कार्यवाहक अधिकारियों के भरोसे चल रही है। इसका खामियाजा प्रदेश की जनता भुगत रही है।
जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश में स्थायी डीजीपी तक नहीं है और सरकार अस्थाई यानी कार्यवाहक डीजीपी से काम चला रही है। यही हाल अन्य विभागों का भी है। फॉरेस्ट का हॉफ, आबकारी एवं कराधान का निदेशक, हिमाचल प्रदेश इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमिशन, यहां तक कि कांगड़ा कोऑपरेटिव बैंक का अध्यक्ष तक कार्यवाहक अधिकारियों के सहारे काम कर रहे हैं। यह एक अंतहीन सिलसिला है जिसमें सरकार अपने पसंदीदा अधिकारियों को कार्यवाहक के तौर पर तैनात कर रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने नए आईएएस, आईपीएस और आईएफएस अधिकारियों को हिमाचल प्रदेश में नियुक्त न करने का लिखित निर्णय केंद्र सरकार को दिया था और इसे आर्थिक बचत का मास्टर स्ट्रोक बताकर प्रचारित किया गया। लेकिन जल्द ही सरकार की पोल खुल गई जब कई चहेते अधिकारियों को दो-दो साल का सेवा विस्तार और पुनर्नियुक्ति दे दी गई। इनमें से कुछ अधिकारी इतने विवादित निकले कि उच्च न्यायालय को आदेश देना पड़ा कि उनसे कोई जिम्मेदारी भरा काम न करवाया जाए।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि संदिग्ध आचरण वाले अधिकारियों का बोलबाला सरकार में साफ दिखाई दे रहा है। कई मंत्री और विधायक तक इन अधिकारियों से परेशान हैं, लेकिन मुख्यमंत्री उनसे पीछा नहीं छुड़ा पा रहे हैं।
जयराम ठाकुर ने सवाल उठाया कि यदि नए अधिकारी प्रदेश पर आर्थिक बोझ हैं तो रिटायर्ड अधिकारियों को उच्च पदों पर बैठाकर सरकार क्यों ढो रही है? उन्होंने कहा कि युवाओं को नौकरी की गारंटी देने वाली सरकार खुद सेवा विस्तार देकर अधिकारियों को 63.5 साल तक नौकरी दे रही है। यह सरकार की दोहरी नीति को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने कुछ अधिकारियों को पहले दागी कहा था लेकिन वही अधिकारी आज सरकार में सबसे प्रभावशाली बन गए हैं। इससे साफ है कि मुख्यमंत्री अपनी मजबूरियों के चलते संदिग्ध अधिकारियों से छुटकारा नहीं पा रहे। जयराम ठाकुर ने चेतावनी दी कि जिस राह पर सरकार चल रही है वह आने वाले समय में प्रदेश और खुद मुख्यमंत्री के लिए भारी पड़ सकती है।