जिंदा मरीज को मुर्दा समझकर भेज दिया मुर्दाघर, थोड़ी देर बाद हिली देह—अस्पताल स्टाफ में मचा हड़कंप
तेलंगाना/31/10/2025
तेलंगाना के महबूबाबाद सरकारी अस्पताल में लापरवाही की हद पार कर देने वाला मामला सामने आया है। पहचान पत्र न होने और साथ में कोई देखने वाला न होने के कारण अस्पताल ने एक मरीज को भर्ती करने से मना कर दिया। कुछ समय बाद वह अचानक बेहोश होकर मुर्दाघर के पास गिर पड़ा। बिना किसी जांच के कर्मचारियों ने उसे मृत मान लिया और सीधे स्ट्रेचर पर रखकर मुर्दाघर में शिफ्ट कर दिया।
मरीज की पहचान राजू के रूप में हुई है, जो चिन्नागुदुर मंडल के जययारम गांव का रहने वाला है और ट्रैक्टर चालक है। जानकारी के अनुसार, राजू पिछले कुछ समय से पैर में दर्द और किडनी की समस्या के चलते कई बार इलाज के लिए अस्पताल आता रहा, लेकिन हर बार पहचान पत्र और अटेंडेंट न होने के कारण उसे वापस भेज दिया जाता था।
गुरुवार को राजू बेहोश होकर मुर्दाघर के बाहर गिर पड़ा। स्टाफ ने जब उसे देखा तो उसकी नाड़ी की जांच किए बिना मृत मान लिया और मुर्दाघर का दरवाज़ा बंद कर दिया। कुछ देर बाद सफाई कर्मचारियों ने देखा कि स्ट्रेचर पर पड़े राजू के शरीर में हल्की हलचल हो रही है। तुरंत इसकी जानकारी अस्पताल प्रशासन को दी गई। मुर्दाघर खोला गया और राजू को तुरंत इमरजेंसी वार्ड में भर्ती किया गया।
घटना प्रकाश में आने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने मामले की आंतरिक जांच के आदेश दिए हैं। रेजिडेंट मेडिकल ऑफिसर ने कहा है कि जिम्मेदार स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और भविष्य में पहचान पत्र या साथ में अटेंडेंट न होने की स्थिति में भी किसी मरीज को उपचार से वंचित नहीं किया जाएगा।
इस घटना के बाद स्थानीय लोगों और अस्पताल कर्मचारियों में गुस्सा है। लोगों का सवाल है—
“अगर सफाई कर्मचारी समय पर हलचल न देखते तो क्या एक जिंदा व्यक्ति को मुर्दा समझकर ठंडे स्टोरेज में डाल दिया जाता?”
यह मामला सरकारी अस्पतालों की लापरवाही और सिस्टम की संवेदनहीनता पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।