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जेएनयू छात्रों ने लद्दाख प्रदर्शनकारियों के समर्थन में केंद्र सरकार के खिलाफ किया प्रदर्शन

नई दिल्ली/26/09/2025

pradarshan

नई दिल्ली: लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग को लेकर शुरू हुए प्रदर्शन के समर्थन में जेएनयू के लेफ्ट समर्थक छात्र और लद्दाख के कई छात्र गुरुवार देर शाम केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने के लिए कैंपस में एकत्र हुए। छात्रों का कहना है कि भारत सरकार ने अपने चुनावी मेनिफेस्टो में लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने का वादा किया था, लेकिन अब तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। छात्रों ने यह भी कहा कि 24 सितंबर को लद्दाख में हुई हिंसा के लिए सरकार और स्थानीय प्रशासन जिम्मेदार हैं।

प्रदर्शनकारी छात्रों ने इस बात से पूरी तरह असहमत जताई कि लद्दाख में हुई हिंसा किसी राजनीतिक या विदेशी साजिश के तहत हुई। उनका आरोप है कि सोनम वांगचुक के एनजीओ के खिलाफ कार्रवाई इस बात का संकेत है कि अगर कोई सरकार के खिलाफ आवाज उठाता है, तो मौजूदा प्रशासन उसके खिलाफ कठोर कदम उठाता है। जेएनयू छात्र प्रदर्शनकारियों के समर्थन में अपनी आवाज उठाते रहेंगे और लद्दाख की मांगों को लेकर लगातार चेतावनी जारी करेंगे।

वहीं, आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर पोस्ट करते हुए सोनम वांगचुक के समर्थन में केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति देश और शिक्षा के लिए समर्पित है और नए-नए आविष्कार कर रहा है, उसे केंद्र सरकार का पूरा तंत्र घटिया राजनीति के तहत प्रताड़ित कर रहा है।

आप नेता मनीष सिसोदिया ने भी कहा कि लद्दाख के लोगों की मांग सुनने और उसका समाधान निकालने की बजाय, बीजेपी ने बंदूकों के दम पर दमन का रास्ता अपनाया। शांत प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलीं, जिससे कई बेगुनाह मारे गए और दर्जनों घायल हुए। उन्होंने कहा कि संविधान जनता को ताक़त देता है, किसी पार्टी को नहीं।

गृह मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि सोनम वांगचुक ने अपने भड़काऊ बयानों के माध्यम से भीड़ को उकसाया और हिंसा के बीच कोई व्यापक प्रयास नहीं किए। 24 सितंबर को लेह में हुई हिंसा के बाद अब तक पांच लोग मारे गए और दर्जनों घायल हुए। लद्दाख प्रशासन ने शांति बनाए रखने के लिए निषेधाज्ञा लागू कर दी है और ज़िले में पांच या अधिक व्यक्तियों के एकत्र होने पर रोक लगाई गई है।

राजनीतिक नेताओं और कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार से हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते आक्रोश को शांत करने के लिए बातचीत करने का आग्रह किया है।

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