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कानपुर में दर्दनाक घटना: बीमारी के डर और तनाव में छात्र ने ली जान, गूगल पर 60 से ज्यादा बार खोज रहा था इलाज

कानपुर/29/10/2025

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कानपुर। द जैन इंटरनेशनल स्कूल में कक्षा 11 में पढ़ने वाले 16 वर्षीय छात्र आरव मिश्रा की मौत से परिवार में कोहराम मचा है। घर लौटते ही कफन में बेटे को देखकर मां और बहन की चीखें पूरे माहौल को गमगीन कर गईं। मां दिव्या फफकते हुए बार-बार कह रही थीं — “हम तुम्हें अकेले छोड़कर क्यों गए… लौट आओ, हम किसके सहारे जिएंगे

जांच में चौंकाने वाला खुलासा

पुलिस जांच में मोबाइल डेटा विश्लेषण से पता चला कि आरव पिछले एक साल से मानसिक बीमारी के लक्षणों को लेकर परेशान था। वह बार-बार इंटरनेट पर अपनी बीमारी से जुड़े लक्षण और इलाज खोजता था। पुलिस के अनुसार, उसने 60-65 बार अपनी बीमारी और उसके समाधान को लेकर गूगल सर्च किया।

कोहना थाना प्रभारी ने बताया कि आरव बिना किसी को बताए अपनी स्थिति समझने की कोशिश कर रहा था और मानसिक बीमारी से जुड़ी जानकारी इंटरनेट से जुटा रहा था। परिवार को उसकी इस परेशानी का अंदाज़ा नहीं था।

परिवार और स्कूल में मातम

पोस्टमार्टम के बाद घर पर जैसे ही आरव का शव पहुँचा, घर में चीख-पुकार मच गई। पिता आलोक मिश्रा सदमे में बेटे का नाम बार-बार दोहराते रहे। दादी नीलम मिश्रा को महिलाएँ संभालती रहीं। आरव होनहार छात्र था — हाईस्कूल में 97% अंक, स्टेट लेवल स्विमिंग खिलाड़ी, बहन भी स्कूल की टॉपर।

घटना की खबर स्कूल पहुँची तो छात्र और शिक्षकों के पैरों तले जमीन खिसक गई। सभी हैरान थे कि इतनी गहरी चिंता आरव अकेले झेल रहा था।

परिजनों को बाद में पता चला तनाव का

परिजनों ने बताया कि दीपावली पर आरव ने अपनी बड़ी बहन मान्या को मानसिक स्थिति से जुड़ी कुछ बातें बताई थीं, लेकिन परिवार पूजा की तैयारियों में लगा था और बात वहीं छूट गई।

मोबाइल में मिला नोट

फॉरेंसिक जांच में मोबाइल के नोटपैड से एक छोटा नोट मिला। पुलिस के अनुसार, यह दर्शाता है कि आरव अपने विचारों से जूझ रहा था और अत्यधिक तनाव में था। परिजनों ने किसी पर कोई आरोप नहीं लगाया है।

मानसिक स्वास्थ्य महत्वपूर्ण है

यह घटना इस ओर ध्यान दिलाती है कि मनोवैज्ञानिक समस्याओं को नजरअंदाज न करें। इंटरनेट बीमारी समझने का समाधान नहीं है, विशेषज्ञ की मदद आवश्यक है।

मदद की ज़रूरत हो तो संपर्क करें

अगर आप या आपका कोई परिचित मानसिक तनाव में है: राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन (24×7): 1800-599-0019 (सरकार द्वारा संचालित) मदद माँगना कमजोरी नहीं, साहस है।

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