कर्ण नंदा ने कहा: अर्बन नक्सल और माओवादी सोच भारत की बड़ी चुनौती
मोदी-अमित शाह नेतृत्व में होगा नक्सल मुक्त भारत
शिमला/28/09/2025
शिमला: भाजपा प्रदेश मीडिया संयोजक कर्ण नंदा ने दिल्ली विज्ञान भवन में आयोजित राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन भारत मंथन 2025 – नक्सल मुक्त भारत में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि अर्बन नक्सल और माओवादी सोच देश के लिए गंभीर चुनौती हैं और इन्हें पहचानकर ही निवारण किया जा सकता है। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मार्च 2026 तक भारत पूरी तरह नक्सल मुक्त होगा।
कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री अमित शाह, भाजपा वरिष्ठ नेता मुरलीधर राव, झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी, आईपीएस प्रवीण वशिष्ठ, पूर्व डिजी सीआरपीएफ कुलदीप सिंह, वाइस चांसलर दिल्ली विश्वविद्यालय प्रो योगेश सिंह, फिल्ममेकर विपुल शाह और बस्तर छत्तीसगढ़ आईजी पी सुन्दराज भी मौजूद थे।
कर्ण नंदा ने कहा कि अर्बन नक्सलवाद और माओवादी विचारधारा शिक्षा संस्थानों और मीडिया के माध्यम से फैल रही है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि बड़े पैमाने पर “पिंजरा तोड़” अभियान जैसी गतिविधियां माओवादी सोच का परिणाम थीं। उन्होंने रैडिकल स्टूडेंट यूनियन, पॉपुलर फ्रंट इंडिया और कैंपस फ्रंट इंडिया को भी इसी सोच की उपज बताया।
नंदा ने माओवादी हिंसा के कई उदाहरण भी दिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय भाजपा नेता मुरलीधर राव पर 1980 और 1986 में माओवादी हमला हुआ था, जबकि झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी के पुत्र की हत्या माओवादियों द्वारा की गई। उन्होंने कहा कि माओवादी और अर्बन नक्सल देश के विकास को नहीं चाहते और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर भरोसा नहीं करते।
कर्ण नंदा ने मोदी सरकार और केंद्रीय मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में किए गए सुरक्षा सुधारों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि 2010 में माओवाद चरम पर था, लेकिन अब सीआरपीएफ और अन्य सुरक्षा बलों की कार्रवाई, आधुनिक हथियार और कोबरा बटालियन जैसी विशेष इकाइयों के माध्यम से माओवादी गढ़ों में लगातार कार्रवाई हो रही है।
उन्होंने कहा कि 20 हजार करोड़ की लागत से 17,500 किलोमीटर सड़कें बनाई जा रही हैं, 600 पोस्ट ऑफिस और 10,500 मोबाइल टावर स्थापित किए गए हैं, जिससे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों का विकास हो रहा है। कर्ण नंदा ने बताया कि दशकों से वामपंथी उग्रवाद (LWE) देश की सबसे बड़ी आंतरिक सुरक्षा चुनौती रहा है, जिसने 10 राज्यों के 180 से अधिक जिलों को प्रभावित किया और 16,000 से अधिक निर्दोष लोगों की जान गई।
कर्ण नंदा ने कहा कि मोदी सरकार की राजनीतिक इच्छाशक्ति और समग्र दृष्टिकोण से माओवादी और नक्सल सोच कमजोर हुई है। अब देश की सुरक्षा और विकास परियोजनाओं के कारण नक्सल विचारधारा टिक नहीं पाएगी और मार्च 2026 तक भारत पूरी तरह नक्सल मुक्त होगा।