कर्नाटक के किसान देवेंद्रप्पा को दिल्ली में मिलेगा संत ईश्वर सम्मान, जैविक खेती से बदली सैकड़ों परिवारों की जिंदगी
नई दिल्ली/05/10/2025
नई दिल्ली: कर्नाटक के कुंबळुर, जिला दावणगेरे के किसान देवेंद्रप्पा को उनकी उन्नत और जैविक धान की खेती के लिए संत ईश्वर सम्मान से सम्मानित किया जाएगा। इस सम्मान समारोह में उन्हें दिल्ली के पूसा कृषि विज्ञान केंद्र में सर कार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव द्वारा सम्मानित किया जाएगा।
देवेंद्रप्पा ने 15 से अधिक प्रकार की उन्नत धान की किस्मों का संरक्षण और संवर्धन किया है, जिसमें प्रमुख रूप से डी.डी. चार तरह के धान शामिल हैं। उनके द्वारा उगाए गए धान से बनने वाला चावल पौष्टिक और औषधीय गुणों से भरपूर है। उनके साथ स्थानीय किसान, उपभोक्ता और जैविक खेती करने वाले युवा किसान जुड़े हुए हैं। गुजरात, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और उत्तराखंड में देशी धान-चावल के लगभग 500 परिवार उनके मार्गदर्शन से लाभान्वित हुए हैं।
देवेंद्रप्पा के अनुसार, वे बिना रासायनिक खाद का प्रयोग किए एक एकड़ से डेढ़ लाख रुपये तक की आमदनी कमाते हैं। जैविक खेती के इस तरीके से धान में औषधीय गुण विकसित होते हैं। उन्होंने 2010 से 12 प्रकार के देशी धान जैसे नवरा, रक्तशालि, बर्मा ब्लॉक आदि का संरक्षण व संवर्धन किया है, जिनके औषधीय और पौष्टिक गुण उपभोक्ताओं को लाभ पहुंचाते हैं।
उत्पादन और विक्रय:
नवरा धान: 3 एकड़ में 3600 किग्रा उत्पादन, धान ₹60/किग्रा, चावल ₹90/किग्रा।
बर्मा ब्लॉक धान: 2.5 एकड़ में 3500 किग्रा उत्पादन, धान ₹150/किग्रा, चावल ₹220/किग्रा।
नवरा चावल शुगर फ्री है और नसों की कमजोरी, जोड़ों के दर्द, लकवा, पंचकर्म और चर्म रोग निवारण में लाभकारी।
रक्तशालि चावल वात-पित्त-कफ संतुलन और हिमोग्लोबिन वृद्धि में सहायक।
करिगजविलि चावल माताओं के दूध बढ़ाने में उपयोगी।
गंधसाल चावल की सुगंध अत्यंत मनमोहक।
देवेंद्रप्पा के कार्य ने समाज में जैविक खेती को बढ़ावा दिया है। उनके खेत और कार्य देखकर कई किसान परिवार जैविक खेती की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। वे जैविक खेती के साथ पशुपालन भी करते हैं, जिसमें 10 गाय, 8 बछड़े, 4 भैंस, 3 भैंस के बछड़े, 50 बकरियां और 50 मुर्गियां शामिल हैं। इनसे तैयार होने वाला जैविक खाद और जीवामृत उनके खेतों में फसलों की गुणवत्ता बढ़ाता है।
देवेंद्रप्पा की मेहनत और सामाजिक योगदान से न केवल उनका परिवार, बल्कि देशभर में कई किसान और उपभोक्ता लाभान्वित हुए हैं। उनकी प्रेरणा से जैविक खेती को अपनाने वाले किसानों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इस उपलब्धि को देखते हुए संत ईश्वर फाउंडेशन ने उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान देने का निर्णय लिया।