कुफरी में एनजीटी का बड़ा एक्शन: बेकाबू टूरिज्म और घोड़ों की अव्यवस्था पर लगी लगाम
हिमाचल सरकार को सख्त दिशा-निर्देश बनाने के आदेश
शिमला/29/10/2025
शिमला। हिमाचल प्रदेश का प्रसिद्ध पर्यटन स्थल कुफरी अब नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की निगरानी में आ गया है। रोहतांग पास की तरह अब यहाँ भी सैलानियों और घोड़ों की संख्या पर रोक लगा दी गई है। एनजीटी ने कुफरी में प्रतिदिन केवल 2232 पर्यटकों की सीमा तय की है और घोड़ों के अनियंत्रित इस्तेमाल से हो रहे पर्यावरणीय नुकसान पर हिमाचल सरकार को तीन महीने के भीतर सख्त दिशा-निर्देश बनाने का आदेश दिया है।
यह फैसला एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेष सदस्य डॉ. ए. सेंथिल वेल की पीठ ने सुनाया है। मामला पर्यावरणविद शैलेंद्र कुमार यादव की याचिका से जुड़ा था, जिसमें बताया गया था कि कुफरी क्षेत्र में 700 से 800 घोड़े बिना किसी वैज्ञानिक प्रबंधन के इस्तेमाल किए जा रहे हैं। इसके कारण वनस्पतियों की जड़ें नष्ट हो रही हैं, घास खत्म हो रही है, और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र पर गंभीर असर पड़ रहा है।
एनजीटी ने कहा कि कुफरी जैसे पर्यावरण-संवेदनशील इलाकों में पर्यटन गतिविधियों को वैज्ञानिक ढंग से नियंत्रित किया जाना चाहिए। यह आदेश जंगलों को बचाने, स्थानीय वन्य जीवन की रक्षा करने और सतत (Sustainable) पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए दिया गया है।
पर्यटन पर असर तय, कारोबारी चिंतित
कुफरी में अब तक बेतहाशा संख्या में सैलानी आते रहे हैं। सर्दियों में जब शिमला में बर्फबारी नहीं होती, तो पर्यटक कुफरी का रुख करते हैं और यहाँ पर बर्फ का आनंद लेते हैं। यही वजह है कि यहाँ होटल कारोबारियों और घोड़ा संचालकों की अच्छी कमाई होती रही है।
अब NGT के आदेश के बाद कारोबारियों में चिंता बढ़ गई है क्योंकि सैलानियों की संख्या तय होने से आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ना तय है।
कुफरी क्यों हुआ इतना लोकप्रिय
शिमला से लगभग 15 किलोमीटर दूर स्थित कुफरी में हर साल हजारों सैलानी आते हैं। यहाँ की महासू पीक तक घुड़सवारी करना पर्यटकों के बीच बेहद लोकप्रिय है। एक सवारी के लिए आमतौर पर 500 रुपये तक का किराया लिया जाता है।
आंकड़ों के मुताबिक, यहाँ 1029 घोड़े रजिस्टर्ड हैं, जबकि कई बिना पंजीकरण के भी सवारी में लगाए जाते हैं। यही अनियंत्रण NGT के दखल का कारण बना।
एनजीटी का रुख पहले भी रहा सख्त
गौरतलब है कि वर्ष 2023 में भी NGT ने हिमाचल के पर्यावरणीय पर्यटन स्थलों पर इसी तरह के निर्देश जारी किए थे, जिनमें रोहतांग पास भी शामिल था। ट्रिब्यूनल ने तब भी कहा था कि अनियंत्रित पर्यटन, वाहनों और घोड़ों की गतिविधियां ग्लेशियरों के पिघलने और जैव विविधता के नष्ट होने का बड़ा कारण बन रही हैं।
अब सरकार के सामने चुनौती
एनजीटी ने हिमाचल सरकार से कहा है कि वह तीन महीनों में एक व्यापक नीति तैयार करे, जिसमें यह तय हो कि कितने घोड़े, कितने सैलानी और कौन-सी गतिविधियां पर्यावरण संतुलन को ध्यान में रखकर की जा सकती हैं।
कुफरी के स्थानीय व्यापारी और घोड़ा संचालक इस फैसले से नाराज़ हैं, जबकि पर्यावरणविदों का कहना है कि “अगर आज नियंत्रण नहीं किया गया, तो कल कुफरी सिर्फ़ नक्शे में रह जाएगा।”
नए आदेश से साफ़ है — अब पहाड़ों की सुंदरता बचाने के लिए सख्ती ज़रूरी है, चाहे कारोबार पर असर क्यों न पड़े।