नेपाल में फिर महसूस हुए भूकंप के झटके, 10 साल पहले की तबाही अब भी याद
नेशनल डेस्क/18/09/2025
नेपाल में रविवार को सुबह भूकंप के झटके महसूस किए गए, जिससे लोग घबराकर घरों से बाहर निकल आए। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी के अनुसार, भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.0 दर्ज की गई। फिलहाल किसी तरह के बड़े नुकसान की खबर नहीं है, लेकिन झटकों ने लोगों को 2015 की भयावह त्रासदी की याद दिला दी।
नेपाल भूकंप प्रवण क्षेत्र में आता है, जहां हर साल छोटे और मध्यम तीव्रता के कई भूकंप दर्ज किए जाते हैं। हिमालयी क्षेत्र में टेक्टोनिक प्लेटों की टक्कर से लगातार दबाव बढ़ता है, जो समय-समय पर भूकंप का कारण बनता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों और काठमांडू जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में इमारतें भूकंप-रोधी नहीं हैं, जिसके चलते खतरा और बढ़ जाता है।
2015 की तबाही अभी भी ताज़ा
आज से ठीक 10 साल पहले, 25 अप्रैल 2015 को नेपाल 7.8 तीव्रता के विनाशकारी भूकंप से हिल गया था। इस आपदा में करीब 9,000 लोग मारे गए और 22,000 से अधिक घायल हुए थे। राजधानी काठमांडू घाटी में सदियों पुराने मंदिर, शाही महल और धरोहरें मलबे में तब्दील हो गई थीं। काठमांडू, ललितपुर और भक्तपुर जैसे ऐतिहासिक शहरों की 90 फीसदी प्राचीन धरोहरें नष्ट हो गई थीं। पशुपतिनाथ मंदिर परिसर और स्वयंभूनाथ क्षेत्र जैसे धार्मिक स्थल भी प्रभावित हुए थे।
पुनर्निर्माण की राह
बीते एक दशक में नेपाल ने आपदा से उबरने की बड़ी कोशिश की है। हजारों स्कूल, अस्पताल, मंदिर और सांस्कृतिक धरोहरों का पुनर्निर्माण किया गया है। साथ ही, नष्ट हुए करीब 90 फीसदी घरों और कई सार्वजनिक भवनों को भी फिर से खड़ा किया गया। काठमांडू घाटी में अब पहले से अधिक सुदृढ़ इमारतें दिखाई देती हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों का ढांचा अभी भी काफी कमजोर है और वहां भूकंप का खतरा बरकरार है।
नेपाल के लोग मानते हैं कि 2015 जैसी त्रासदी ने उन्हें भूकंप के प्रति सतर्क तो किया है, लेकिन लगातार आने वाले छोटे झटके उन्हें यह एहसास कराते रहते हैं कि धरती का खतरा अभी भी पूरी तरह टला नहीं है।