ढाई साल में 1 लाख से ज्यादा बच्चों को तस्करी से बचाया गया, सरकार और NGOs ने मिलकर काम किया
नई दिल्ली/08/10/2025
नई दिल्ली: बाल अधिकारों के क्षेत्र में काम करने वाले संगठनों ने बुधवार को दावा किया कि पिछले ढाई सालों में देशभर में 1 लाख से अधिक बच्चों को तस्करी से बचाया गया। इन बच्चों को विभिन्न हिस्सों के ईंट भट्टा उद्योग, निर्माण स्थल, दुकानें, चाय की दुकानें और फुटपाथ से सुरक्षित किया गया।
बाल तस्करी भारत में एक गंभीर अपराध है, जिसमें बच्चे शारीरिक, यौन और भावनात्मक हिंसा के साथ-साथ जबरन मजदूरी, जबरन विवाह और गुलामी जैसी समस्याओं का सामना करते हैं। इसके खिलाफ कार्रवाई का दायित्व राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) और राज्य सरकारों का है।
देशभर में 250 से अधिक बाल संरक्षण संगठनों के नेटवर्क 'जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन' (JRC) के माध्यम से अप्रैल 2023 से सितंबर 2025 के बीच 1,10,000 बच्चों को तस्करी से बचाया गया। आंकड़ों के अनुसार, बचाए गए बच्चों की सबसे अधिक संख्या तेलंगाना से थी (30,267), इसके बाद बिहार से 10,211, उत्तर प्रदेश से 9,445, राजस्थान से 8,278 और दिल्ली से 6,564 बच्चे बचाए गए।
बाल अधिकार विशेषज्ञों की राय:
जेआरसी की वरिष्ठ सलाहकार (नीति एवं अनुसंधान) ज्योति माथुर ने बताया कि राज्य सरकार के सक्रिय कदमों से सैकड़ों बच्चों को बचाया जा सका है। ‘ऑपरेशन मुस्कान’ और ‘ऑपरेशन स्माइल’ जैसे अभियान नियमित रूप से चलाए जाते हैं। इसके अलावा, चेहरे की पहचान करने वाला ऐप ‘दर्पण’ बच्चों का पता लगाने में मदद करता है।
विशेषज्ञों ने बताया कि बाल तस्करी के प्रमुख कारण हैं:
शैक्षिक सुविधाओं की कमी
गरीबी और जागरूकता की कमी
सामाजिक कमजोरियां और भेदभाव
सस्ते और लचीले श्रम की मांग
परंपराएं और सामाजिक प्रथाएं
यह आंकड़ा दिखाता है कि सरकार और गैर-सरकारी संस्थाओं के संयुक्त प्रयासों से बच्चों को तस्करी से बचाना संभव है, लेकिन इसके लिए सतत जागरूकता, कड़ी निगरानी और प्रभावी कानूनी कार्रवाई आवश्यक है।