पीएम मोदी का अरुणाचल-त्रिपुरा दौरा आज, करेंगे 5100 करोड़ की परियोजनाओं का शुभारंभ
नई दिल्ली/22/09/2025
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को पूर्वोत्तर भारत के दो महत्वपूर्ण राज्यों अरुणाचल प्रदेश और त्रिपुरा का दौरा करेंगे। इस यात्रा के दौरान वह 5100 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं का शुभारंभ और उद्घाटन करेंगे। इन पहलों का उद्देश्य क्षेत्र में ऊर्जा, आधारभूत संरचना और सामाजिक-आर्थिक विकास को नई दिशा देना है।
अरुणाचल प्रदेश में जलविद्युत परियोजनाओं की नींव
प्रधानमंत्री मोदी सबसे पहले अरुणाचल प्रदेश की राजधानी ईटानगर पहुंचेंगे। यहां वह दो प्रमुख जलविद्युत परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे –
हीओ हाइड्रो इलेक्ट्रिक परियोजना (240 मेगावाट, 3x80 मेगावाट)
टाटो-I हाइड्रो इलेक्ट्रिक परियोजना (186 मेगावाट, 3x62 मेगावाट)
इन परियोजनाओं की अनुमानित लागत 3700 करोड़ रुपये से अधिक है। इन्हें उत्तर पूर्वी इलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन (NEEPCO) द्वारा, अरुणाचल प्रदेश सरकार के साथ संयुक्त उद्यम (JV) के तहत विकसित किया जा रहा है।
हीओ परियोजना से हर साल करीब 1000 मिलियन यूनिट (MU) बिजली का उत्पादन होगा।
टाटो-I परियोजना से लगभग 803 मिलियन यूनिट (MU) बिजली पैदा होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन परियोजनाओं से न केवल राज्य की विशाल जलविद्युत क्षमता का दोहन होगा बल्कि सतत और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा।
त्रिपुरा में मंदिर परिसर का विकास
अरुणाचल प्रदेश में अपने कार्यक्रमों के बाद प्रधानमंत्री मोदी त्रिपुरा के उदयपुर पहुंचेंगे। यहां वह माता त्रिपुर सुंदरी मंदिर परिसर में विकास कार्यों का उद्घाटन करेंगे। यह मंदिर त्रिपुरा का ऐतिहासिक और आध्यात्मिक केंद्र माना जाता है।
प्रधानमंत्री का यहां का कार्यक्रम लगभग 45 मिनट का होगा, जिसमें वह धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल होंगे। इस दौरान किसी सार्वजनिक संबोधन की उम्मीद नहीं है। प्रधानमंत्री मोदी अगरतला के महाराजा बीर बिक्रम हवाई अड्डे से हेलीकॉप्टर द्वारा पलाटना पहुंचेंगे और वहां से सड़क मार्ग से मंदिर स्थल जाएंगे।
क्षेत्रीय विकास और लाभ
अधिकारियों का कहना है कि इन परियोजनाओं से स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, जिससे क्षेत्र की सामाजिक-आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। ऊर्जा उत्पादन से राज्य न केवल अपनी जरूरतें पूरी कर सकेगा बल्कि अतिरिक्त बिजली को राष्ट्रीय ग्रिड में भी शामिल किया जा सकेगा।
साथ ही, यह परियोजनाएं भारत के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों में अहम योगदान देंगी। अरुणाचल प्रदेश और त्रिपुरा जैसे सीमावर्ती राज्यों में इस तरह की विकास परियोजनाएं प्रधानमंत्री मोदी के 2047 तक विकसित भारत के विजन को साकार करने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही हैं।