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पीएम मोदी करेंगे नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन, भारत बनेगा वैश्विक विमानन हब

मुंबई/05/10/2025

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मुंबई: देश के विमानन इतिहास में एक और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगामी 8 अक्टूबर 2025 को नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट (NMIA) का भव्य उद्घाटन करेंगे। यह एयरपोर्ट भारत की विमानन क्षमता को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा और मुंबई को दुनिया के उन चुनिंदा शहरों में शामिल करेगा जहां दो बड़े अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे होंगे — जैसे लंदन, न्यूयॉर्क और टोक्यो। इस एयरपोर्ट को एशिया के सबसे उन्नत और पर्यावरण के अनुकूल हवाई अड्डों में गिना जा रहा है, जो देश की आधुनिकता और हरित विकास के संयोजन का प्रतीक बनेगा।

1160 हेक्टेयर में फैला यह अत्याधुनिक हवाई अड्डा अडाणी एयरपोर्ट होल्डिंग्स (74%) और सिडको (26%) के बीच सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल पर विकसित किया गया है। एयरपोर्ट का डिजाइन भारतीय संस्कृति के प्रतीक कमल के आकार पर आधारित है, जो पारंपरिक सौंदर्य और आधुनिक इंजीनियरिंग का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है। बताया जा रहा है कि पहले चरण में एक रनवे और एक टर्मिनल तैयार किया गया है, जो हर साल लगभग दो करोड़ यात्रियों की आवाजाही संभाल सकेगा। जब पूरा एयरपोर्ट बनकर तैयार होगा, तो इसमें चार टर्मिनल और दो रनवे होंगे, जिससे मुंबई और छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट (CSMIA) की संयुक्त क्षमता 15.5 करोड़ यात्रियों प्रति वर्ष तक बढ़ जाएगी।

नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट को एक प्रमुख कार्गो हब के रूप में भी विकसित किया जा रहा है। इसकी शुरुआती सालाना कार्गो क्षमता 5 लाख टन होगी, जो पूर्ण क्षमता पर 32 लाख टन तक पहुंच जाएगी। यह पूरी तरह से एआई-सक्षम और ऑटोमेटेड सिस्टम से लैस एयरपोर्ट होगा, जो भारत की डिजिटल विमानन क्रांति की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इसके साथ ही यह एयरपोर्ट भारत के लिए रोजगार का भी एक विशाल केंद्र बनेगा। अनुमान है कि इस परियोजना से विमानन, लॉजिस्टिक्स, आईटी, आतिथ्य और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों में दो लाख से अधिक रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

पर्यावरण की दृष्टि से भी यह हवाई अड्डा देश के लिए एक आदर्श उदाहरण बनेगा। इसमें नवीकरणीय ऊर्जा, वर्षा जल संचयन, सौर ऊर्जा संयंत्र, और सस्टेनेबल कूलिंग टेक्नोलॉजी जैसी पर्यावरण-मित्र सुविधाएँ शामिल होंगी। इस एयरपोर्ट का उद्देश्य भारत के विमानन बुनियादी ढांचे को भविष्य के लिए तैयार करना है, ताकि देश न केवल घरेलू बल्कि अंतरराष्ट्रीय हवाई यातायात का भी एक प्रमुख केंद्र बन सके।

भारत का विमानन क्षेत्र हाल के वर्षों में तेज़ी से विकसित हुआ है। 2014 में जहां देश में 74 हवाई अड्डे संचालित थे, वहीं 2025 तक यह संख्या 163 तक पहुंच गई है। सरकार का लक्ष्य है कि 2047 तक देश में 400 से अधिक हवाई अड्डे विकसित किए जाएं। नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अनुसार, 2030 तक भारत का यात्री यातायात दोगुना होकर 50 करोड़ यात्रियों तक पहुंच जाएगा, जबकि माल ढुलाई क्षमता तिगुनी होकर 1 करोड़ टन तक बढ़ने की उम्मीद है। यह भारत को एक सशक्त वैश्विक विमानन हब के रूप में स्थापित करेगा।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत की प्रतिष्ठा में लगातार इजाफा हो रहा है। हाल ही में भारत को अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) की परिषद में पुनः निर्वाचित किया गया है, और इस बार भारत को पहले से अधिक मत मिले हैं। भारत 1944 से इस संगठन का संस्थापक सदस्य है और पिछले 81 वर्षों से वैश्विक विमानन सुरक्षा, संरक्षा और स्थिरता में एक अहम भूमिका निभा रहा है।

नागरिक उड्डयन सचिव के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत ने विमानन क्षेत्र में एक परिवर्तनकारी युग की शुरुआत की है। सरकार की कनेक्टिविटी, सुरक्षा और स्थिरता के प्रति अटूट प्रतिबद्धता ने भारत को दुनिया के सबसे तेजी से विकसित होने वाले विमानन बाजारों में अग्रणी बना दिया है।

नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन भारत के लिए सिर्फ एक इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्धि नहीं होगा, बल्कि यह देश की नई पहचान बनेगा — एक आधुनिक, तकनीकी रूप से सशक्त और हरित विकास की ओर अग्रसर भारत की तस्वीर। यह परियोजना भारत की प्रगति, आत्मनिर्भरता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा की दिशा में एक सशक्त कदम साबित होगी।

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