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पुणे के शनिवारवाड़ा में नमाज़ विवाद से मचा बवाल — ऐतिहासिक धरोहर बना राजनीति का अखाड़ा

पुणे/21/10/2025

shanivar wada

पुणे। महाराष्ट्र के ऐतिहासिक शनिवारवाड़ा किले में कुछ मुस्लिम महिलाओं द्वारा नमाज़ पढ़ने के कथित वीडियो के वायरल होने के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। यह किला मराठा साम्राज्य की शान और पेशवा बाजीराव प्रथम की विरासत का प्रतीक माना जाता है, लेकिन अब धार्मिक टकराव का केंद्र बन गया है।

घटना का वीडियो सामने आने के बाद हिंदू संगठनों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। भाजपा सांसद मेधा कुलकर्णी सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ शनिवारवाड़ा पहुंचीं और गोमूत्र छिड़ककर “शुद्धिकरण” किया। प्रदर्शन के दौरान उन्होंने कहा कि “शनिवारवाड़ा हिंदू गौरव का प्रतीक है, यहां नमाज़ पढ़ना अपमानजनक है।” इस कदम के बाद विपक्षी दलों ने भाजपा पर communal माहौल बिगाड़ने का आरोप लगाया।

शनिवारवाड़ा का गौरवशाली इतिहास


शनिवारवाड़ा का निर्माण 1730 में पेशवा बाजीराव प्रथम ने करवाया था और 1732 में यह सात मंजिला महल तैयार हुआ। मराठा शासन के दौरान यह पेशवाओं की राजधानी और सत्ता का केंद्र था। हालांकि, 1828 में लगी भीषण आग के कारण यह शानदार महल खंडहर में बदल गया। आज भी इसके विशाल द्वार, गहरी नींव और पत्थर की दीवारें इतिहास की गवाही देती हैं। यह वही स्थान है जहां 1773 में पेशवा नारायण राव की हत्या हुई थी, जिसने मराठा इतिहास में एक काला अध्याय लिखा।

विवाद कैसे शुरू हुआ?

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में कुछ महिलाएं शनिवारवाड़ा परिसर में चटाई बिछाकर नमाज़ पढ़ती दिखाई दे रही हैं। उनके आसपास बच्चे और पर्यटक भी मौजूद हैं। वीडियो सामने आने के बाद हिंदू संगठनों ने इसे मराठा गौरव का अपमान बताया और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।

विवाद बढ़ने पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने पुलिस में शिकायत दी। पुणे सिटी पुलिस ने “प्राचीन स्मारक और पुरातात्विक स्थल एवं अवशेष अधिनियम, 1959” के तहत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की है। पुलिस के अनुसार, यह घटना शनिवार दोपहर करीब 1:45 बजे की है।

इलाके में तनाव, सुरक्षा बढ़ाई गई


भाजपा सांसद कुलकर्णी के साथ ‘पतित पावन संगठन’ और ‘हिंदू सकल समाज’ के कार्यकर्ताओं ने शनिवारवाड़ा में विरोध करते हुए शुद्धिकरण किया। इस दौरान उन्होंने शिव वंदना की और पास की दरगाह के सामने भी नारेबाजी की कोशिश की। पुलिस ने स्थिति बिगड़ने से पहले ही प्रदर्शनकारियों को रोका, लेकिन इलाके में तनाव फैल गया। अब शनिवारवाड़ा के आसपास सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं


महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे ने कहा —

“शनिवारवाड़ा हमारी वीरता का प्रतीक है। अगर हिंदू मजार पर हनुमान चालीसा पढ़ें तो क्या यह स्वीकार्य होगा? नमाज़ केवल निर्धारित जगहों पर होनी चाहिए।”

वहीं, AIMIM प्रवक्ता वारिस पठान ने भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा —

“तीन मिनट की नमाज़ ने इन्हें इतना परेशान कर दिया। संविधान सभी को धार्मिक स्वतंत्रता देता है। BJP समाज में नफरत फैलाने की कोशिश कर रही है।”

समाजवादी पार्टी के नेता अबू आसिम आज़मी ने भी कहा —

“मुसलमानों ने देश के लिए बलिदान दिया है, लेकिन आज उन्हें अपमानित किया जा रहा है। भाजपा सांसदों को अल्लाह का डर होना चाहिए।”

एक समय मराठा साम्राज्य की शक्ति और वैभव का प्रतीक रहा शनिवारवाड़ा अब धार्मिक और राजनीतिक विवादों का केंद्र बन गया है। यह किला, जो कभी इतिहास और संस्कृति की पहचान था, आज आस्था और राजनीति की जंग का मैदान बनता दिख रहा है।

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