‘राधे-राधे’ पर आपत्ति से उठी सियासी हलचल: संदीपनी भारद्वाज बोले—मुख्यमंत्री सुक्खू की सोच सनातन विरोधी
शिमला। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा कांगड़ा में बच्चों के “राधे-राधे” कहने पर आपत्ति जताने वाला वीडियो सामने आते ही राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता संदीपनी भारद्वाज ने मुख्यमंत्री के इस रुख को सनातन विरोधी मानसिकता का खुला संकेत बताया है।
संदीपनी भारद्वाज ने कहा कि यह पहला अवसर नहीं है जब मुख्यमंत्री ने सनातन पर सवाल उठाए हों। इससे पहले भी वह यह बयान दे चुके हैं कि वे “97 प्रतिशत हिंदू बहुल हिमाचल में सनातन को हराकर सत्ता में आए हैं।” अब बच्चों के अभिवादन पर आपत्ति जताना उसी सोच की अगली कड़ी है।
भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री की यह मानसिकता प्रशासनिक कार्रवाइयों में भी साफ दिखाई देती है। पांवटा साहिब, संजौली और ऊना में हिंदू समाज के खिलाफ घटनाओं पर पीड़ितों के खिलाफ ही एफआईआर दर्ज की गई, जबकि लव जिहाद और जबरन धार्मिक गतिविधियों में शामिल लोगों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई अक्सर नज़र नहीं आती।
उन्होंने कहा कि सरकार ने आस्था पर आर्थिक प्रहार भी किया है — चिंतपूर्णी में हवन के लिए 100 रुपये, चूड़धार में दर्शन शुल्क 200 रुपये और मणिमहेश यात्रा पर लगाया गया शुल्क सीधे-सीधे मंदिरों व यात्राओं को राजस्व का स्रोत बनाने जैसा है। इससे भी बड़ी चिंता यह है कि मंदिरों में चढ़ाई जाने वाली दानराशि को राजनीतिक नियुक्तियों की तनख्वाहों में खर्च किया जा रहा है।
संदीपनी भारद्वाज ने चेतावनी दी कि हिमाचल की 97 प्रतिशत सनातनी जनता इस व्यवहार को देख रही है और आने वाले समय में इसका कड़ा जवाब देगी। उन्होंने कहा कि भाजपा सनातन आस्था और हिंदू समाज के सम्मान की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष जारी रखेगी।