रामलीला में आतंकियों के पुतलों की पिटाई, गूंजे नारे – “आतंकवाद मुर्दाबाद”
नई दिल्ली/04/10/2025
नई दिल्ली। विश्व प्रसिद्ध लव कुश रामलीला के अंतिम दिन शुक्रवार को लालकिला मैदान में आतंकवाद के खिलाफ लोगों का गुस्सा साफ देखने को मिला। जैसे ही पाकिस्तानी आतंकियों के पुतले मंच से नीचे गिराए गए, दर्शकों ने जूते-चप्पलों और लाठियों से उनकी जमकर पिटाई की। इस दौरान पूरा मैदान “आतंकवाद मुर्दाबाद” के नारों से गूंज उठा।
पुतलों को आग लगाने की अनुमति नहीं मिली
रामलीला समिति के अध्यक्ष अर्जुन कुमार ने पहले ही घोषणा की थी कि इस बार आतंकवादियों के पुतले जलाए जाएंगे, लेकिन अनुमति न मिलने के कारण ऐसा संभव नहीं हो पाया। इसके स्थान पर आतंकियों के पुतलों को प्रतीकात्मक रूप से मंच से नीचे गिरा दिया गया। जैसे ही पुतले नीचे गिरे, उपस्थित लोग गुस्से में भर गए और हाथ में जो भी आया उससे पुतलों को पीटना शुरू कर दिया। अर्जुन कुमार ने कहा कि यह दृश्य इस बात का प्रतीक है कि समाज कभी आतंकवाद को स्वीकार नहीं करेगा।
भव्य मंचन और राजतिलक का दृश्य
रामलीला के अंतिम दिन मंच पर हनुमान-भरत संवाद, श्रीराम का सीता, लक्ष्मण और हनुमान के साथ अयोध्या प्रस्थान, नगरवासियों द्वारा स्वागत और श्रीराम के राजतिलक जैसे भव्य दृश्य मंचित किए गए। मंच पर सैकड़ों कलाकारों ने एक साथ अभिनय किया, जिससे पूरा वातावरण रामराज्य की झलकियों से गूंज उठा। आरती और राज्याभिषेक के दृश्य ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
नव श्री धार्मिक लीला समिति का आयोजन
इसी बीच नव श्री धार्मिक लीला कमेटी (पंजी.) द्वारा भी लीला का आयोजन भव्य रूप से संपन्न हुआ। इसमें भगवान श्रीराम और भरत मिलन का भावुक दृश्य प्रस्तुत किया गया, जिसने दर्शकों की आंखों को नम कर दिया। इस अवसर पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता भी उपस्थित रहीं। उन्होंने मंच पर भगवान श्रीराम का तिलक किया और रामराज्य की स्थापना के अद्भुत प्रसंग का अवलोकन किया।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का स्वागत
मुख्यमंत्री का मंच पर पदाधिकारियों ने जोरदार स्वागत किया। इसके बाद मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के राज्याभिषेक का दृश्य मंचित किया गया, जिसमें सीता, लक्ष्मण, हनुमान और गुरु वशिष्ठ भी सम्मिलित हुए। यह दृश्य भक्तों के लिए प्रेरणादायी और अविस्मरणीय रहा।
आतंकवाद विरोध का सशक्त संदेश
लालकिला मैदान में आयोजित इस रामलीला ने आतंकवाद के खिलाफ जनभावनाओं को उजागर किया। आतंकियों के पुतलों की पिटाई के प्रतीकात्मक दृश्य ने यह साफ कर दिया कि भारत की जनता आतंकवाद को कभी स्वीकार नहीं करेगी। यह अनोखा आयोजन श्रद्धा, भक्ति और जनाक्रोश – तीनों भावनाओं का संगम साबित हुआ।