RBI ने बैंकों और ग्राहकों के लिए बड़े ऐलान किए, आम लोगों पर होगा सीधा असर
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने अपने हालिया मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) फैसलों में बैंकों, कारोबारियों और आम ग्राहकों के लिए कई अहम निर्णय लिए हैं। इन निर्णयों से बैंकिंग सेक्टर में लचीलापन बढ़ेगा और ग्राहकों को नई सुविधाएं मिलेंगी।
शहरी सहकारी बैंकों (UCBs) के लिए नई शुरुआत:
RBI ने 2004 से रुकी हुई अर्बन को-ऑपरेटिव बैंकों (UCBs) की लाइसेंसिंग प्रक्रिया पर नया कंसल्टेशन पेपर लाने की तैयारी शुरू कर दी है। इससे छोटे शहरों और कस्बों में बैंकिंग सुविधाओं का विस्तार होगा। लंबे समय से नई लाइसेंसिंग पर रोक के कारण इस सेक्टर में नई एंट्री नहीं हो पा रही थी।
बैंकों को मिली छूट:
अब बैंकों को करंट अकाउंट और ओवरड्राफ्ट अकाउंट (OD) खोलने और चलाने में ज्यादा छूट मिलेगी। इसका फायदा सीधे छोटे और बड़े कारोबारियों को होगा, जिन्हें व्यापारिक लेन-देन के लिए इन सुविधाओं की आवश्यकता होती है।
एक्सपोर्टर्स को राहत:
RBI ने कहा कि निर्यातक भारत की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए, विदेशी मुद्रा खातों से पैसा वापस लाने की समय-सीमा एक महीने से बढ़ाकर तीन महीने कर दी गई है। इसका मतलब है कि निर्यातकों को विदेशी खरीदारों से भुगतान प्राप्त करने के लिए अधिक समय मिलेगा।
विदेशी मुद्रा उधारी (ECB) नियमों में सुधार:
RBI ने ECB से जुड़े नियमों को सरल और व्यवहारिक बनाने की घोषणा की। ये बदलाव FEMA (Foreign Exchange Management Act) के तहत होंगे, जिससे कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय फंडिंग जुटाने में आसानी होगी।
ग्राहकों की शिकायतों पर सख्ती:
RBI ने ओम्बड्समैन स्कीम में सुधार की घोषणा की है। अब इस स्कीम के दायरे में ग्रामीण सहकारी बैंक भी शामिल होंगे। इसका मतलब यह है कि छोटे शहर और गांव के ग्राहक भी अगर किसी बैंक से परेशान हैं तो सीधे इस स्कीम के तहत शिकायत दर्ज कर सकेंगे। इससे ग्राहकों को सुरक्षा और भरोसा बढ़ेगा।
RBI के ये ऐलान बैंकिंग सेक्टर में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं। इससे बैंकों और कारोबारियों को नई सुविधाएं मिलेंगी और आम ग्राहकों को अपनी शिकायतों का समाधान आसानी से प्राप्त होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि इन कदमों से बैंकिंग प्रणाली अधिक पारदर्शी, लचीली और ग्राहक-केंद्रित बनेगी।