रेणुका ठाकुर 13 की उम्र में छोड़ा घर, आज भारत की शान बनीं तेज गेंदबाज
शिमला | संघर्ष, जिद और जुनून से लिखी गई यह कहानी किसी फिल्म की पटकथा जैसी लगती है। हिमाचल प्रदेश के रोहड़ू क्षेत्र के एक छोटे से गाँव से निकलकर भारतीय महिला क्रिकेट टीम की तेज गेंदबाज बनीं रेणुका ठाकुर आज देशभर की लड़कियों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं।
बचपन में टूटा सहारा, पर नहीं टूटी हिम्मत
रेणुका जब मात्र दो साल की थीं, तब उनके पिता स्व. केहर सिंह ठाकुर का निधन हो गया। पिता खुद क्रिकेट के बड़े प्रशंसक थे और बेटी को इस खेल में आगे बढ़ते देखना चाहते थे, लेकिन उनका सपना अधूरा रह गया। इस कठिन समय में माँ सुनीता ठाकुर ने जल शक्ति विभाग में चौकीदार की नौकरी करके परिवार को संभाला और बेटी के सपनों को जिंदा रखा।
गाँव के मैदान से शुरू हुआ सफर
रेणुका अक्सर गाँव के मैदान में लड़कों के साथ कपड़े की गेंद से क्रिकेट खेला करती थीं। एक दिन उनके चाचा भूपिंद्र ठाकुर, जो कॉलेज में प्रोफेसर हैं, ने उनकी तेज़ गेंदबाजी देखी और पहचान लिया कि यह बच्ची प्रतिभा की खान है। उन्होंने रेणुका को धर्मशाला क्रिकेट अकादमी भेजने की पहल की — वहीं से शुरू हुआ एक नया अध्याय।
मेहनत और लगन से मिली पहचान
धर्मशाला अकादमी में कोच के मार्गदर्शन में रेणुका ने खुद को निखारा। साल 2019 के बीसीसीआई महिला एकदिवसीय टूर्नामेंट में उन्होंने 23 विकेट झटके और सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज बनीं। इसके बाद 7 अक्टूबर 2021 को उन्होंने भारतीय टीम के लिए डेब्यू किया।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर चमकी सितारा
कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में रेणुका ने पाँच मैचों में 11 विकेट लेकर सबका ध्यान खींचा। उनके शानदार प्रदर्शन के लिए आईसीसी ने उन्हें साल की उभरती खिलाड़ी का पुरस्कार दिया।
आईपीएल में भी धमाकेदार एंट्री
महिला आईपीएल के पहले सीज़न में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर (RCB) ने उन्हें 1.40 करोड़ रुपये में खरीदा।
आज रेणुका ठाकुर न सिर्फ हिमाचल बल्कि पूरे भारत की शान बन चुकी हैं। उनका सफर साबित करता है कि अगर हौसला बुलंद हो, तो हालात कभी मंज़िल की राह नहीं रोक सकते।