NEWS CHOICE

निष्पक्ष खबर, बेबाक अंदाज

रोहड़ू में दलित बच्चे की आत्महत्या केस में बड़ा फैसला — हाईकोर्ट ने मुख्य आरोपी की अग्रिम जमानत रद्द की, गिरफ्तारी के आसार

शिमला/14/10/2025

hp COURT

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने रोहड़ू उपमंडल के लिम्बड़ा गांव में 12 वर्षीय दलित बच्चे की आत्महत्या के मामले में बड़ा निर्णय सुनाया है। अदालत ने इस मामले में मुख्य आरोपी को दी गई अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) को खारिज करते हुए साफ कहा कि एससी-एसटी एक्ट की धारा 18 के तहत इस तरह की जमानत वैध नहीं है।

जस्टिस राकेश कैंथला की एकल पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि जब किसी मामले में अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धाराएं लागू होती हैं, तो उसमें अग्रिम जमानत का प्रावधान नहीं है। अब कोर्ट के इस फैसले के बाद आरोपी की गिरफ्तारी की पूरी संभावना बन गई है।

यह दर्दनाक घटना 16 सितंबर 2025 को रोहड़ू उपमंडल के चिड़गांव थाना क्षेत्र के लिम्बड़ा गांव में हुई थी, जहां एक 12 वर्षीय दलित बच्चे ने जहर निगलकर आत्महत्या कर ली थी। शुरू में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 107, 127(2), 115(2) और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया था। लेकिन जब जांच में छुआछूत और जातिगत भेदभाव के तथ्य सामने आए, तो इसमें एससी-एसटी एक्ट की धाराएं भी जोड़ी गईं।

पीड़ित बच्चे की मां ने आरोप लगाया था कि गांव की तीन महिलाओं ने उसके बेटे को निर्दयता से पीटा और फिर गोशाला में बंद कर दिया था। अपमान और भय से आहत होकर बच्चे ने जहर खा लिया, जिससे उसकी मौत हो गई। बताया गया कि घटना की वजह यह थी कि बच्चे ने कथित तौर पर गांव की एक महिला पुष्पा देवी के घर को छू लिया था, जिसके बाद उस पर अमानवीय अत्याचार किए गए।

पहले आरोपी को हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत मिल चुकी थी, लेकिन एससी-एसटी एक्ट की धाराएं जुड़ने के बाद मामला फिर से अदालत में पेश हुआ। अब मंगलवार को हाईकोर्ट ने आरोपी की जमानत को रद्द कर दिया, जिससे न्याय प्रक्रिया में नई दिशा मिली है।

पीड़ित परिवार ने अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि अब उन्हें न्याय की उम्मीद जगी है। उनका कहना है कि समाज में ऐसे अपराधों के खिलाफ कड़ा संदेश जाना जरूरी है, ताकि किसी भी बच्चे के साथ जातिगत भेदभाव के नाम पर अमानवीय व्यवहार न हो।

Scroll to Top