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संजौली मस्जिद विवाद फिर भड़का, संघर्ष समिति आमरण अनशन पर — अवैध ढांचा गिराने और FIR वापसी की मांग तेज

शिमला/18/11/2025

ANSHANNNN

शिमला के संजौली क्षेत्र में विवादित मस्जिद को लेकर तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। देवभूमि संघर्ष समिति ने सोमवार सुबह संजौली थाने के बाहर आमरण अनशन शुरू कर दिया। समिति के पदाधिकारियों ने साफ कहा कि जब तक उनकी तीन मुख्य मांगें पूरी नहीं होतीं, अनशन जारी रहेगा। इनमें बीते शुक्रवार को समिति के छह सदस्यों—जिनमें तीन महिलाएं भी शामिल हैं—पर दर्ज एफआईआर को वापस लेना, मस्जिद का बिजली-पानी कनेक्शन काटना और अदालत के आदेशानुसार पूरे अवैध ढांचे को तत्काल ध्वस्त करना शामिल है।

विवाद उस समय फिर उभर आया जब शुक्रवार को समिति ने अदालत द्वारा अवैध घोषित मस्जिद में बाहरी राज्यों से पहुंचे लोगों को नमाज पढ़ने से रोका। इस दौरान दोनों समुदायों के बीच कहासुनी हुई और कई लोग बिना नमाज पढ़े ही लौट गए। घटना के बाद संजौली पुलिस ने धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप में छह लोगों को नामजद किया, जिसके बाद संघर्ष समिति खुलकर विरोध में उतर आई है।

समिति के सह-सयोजक मदन ठाकुर का आरोप है कि अदालत ने मस्जिद को अवैध मानते हुए ढांचा गिराने के निर्देश दिए हैं, लेकिन फिर भी प्रशासन ने न बिजली-पानी काटा और न ही कार्रवाई शुरू की। उल्टा, समिति के कार्यकर्ताओं पर मामले दर्ज कर उन्हें डराने की कोशिश की जा रही है। वहीं पदाधिकारी विकास थापटा का कहना है कि नगर निगम आयुक्त द्वारा जारी मस्जिद गिराने के आदेश को जिला अदालत भी सही ठहरा चुकी है, इसके बाद भी अवैध ढांचा जस का तस खड़ा है और मस्जिद में गतिविधियां जारी हैं।

संजौली मस्जिद विवाद कोई नया नहीं है। यह मुद्दा पिछले वर्ष तब सूबे में बड़ी आग की तरह फैल गया था जब 31 अगस्त को मैहली में हुए झगड़े के बाद कुछ लोग संजौली मस्जिद में छिप गए थे। इससे गुस्साई भीड़ ने अगले दिन मस्जिद के बाहर प्रदर्शन किया और कई दिनों तक शिमला सहित विभिन्न जिलों में तनावपूर्ण हालात बने रहे। 11 सितंबर को स्थिति इतनी बिगड़ी कि पुलिस को भीड़ पर नियंत्रण के लिए बल प्रयोग और वाटर कैनन का सहारा लेना पड़ा। इसके बाद 12 सितंबर को मस्जिद कमेटी स्वयं निगम कमिश्नर कोर्ट पहुंची और अवैध हिस्से को गिराने पर सहमति जताई, जिससे विवाद कुछ समय के लिए शांत हुआ।

करीब 16 साल चली कानूनी प्रक्रिया के बाद नगर निगम आयुक्त ने 3 मई 2025 को मस्जिद को पूरी तरह अवैध घोषित करते हुए पूरे ढांचे को गिराने का आदेश दिया था। वक्फ बोर्ड और मस्जिद कमेटी ने इस आदेश को जिला अदालत में चुनौती दी, लेकिन 30 अक्टूबर को अदालत ने याचिका खारिज करते हुए निगम आयुक्त के फैसले को बरकरार रखा।

अब 14 नवंबर की ताज़ा घटना, जिसमें बाहरी राज्यों से आए लोगों को नमाज पढ़ने से रोका गया, ने फिर से तनाव बढ़ा दिया है। स्थानीय महिलाओं का कहना है कि पहले भी बाहरी लोगों की गतिविधियों से इलाके में असुरक्षा की भावना बनी रहती थी, इसलिए लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। इसी पृष्ठभूमि में संघर्ष समिति ने आमरण अनशन शुरू कर प्रशासन पर दबाव बढ़ा दिया है, और संजौली एक बार फिर कानून-व्यवस्था की बड़ी परीक्षा बन गया है।

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