भारत की बड़ी रणनीतिक चाल: चिनाब नदी पर सावलकोट जलविद्युत परियोजना को मिली मंजूरी
पाकिस्तान को मिला कड़ा संदेश
नई दिल्ली/11/10/2025
भारत ने जम्मू-कश्मीर में चिनाब नदी पर बनने वाली 1,856 मेगावाट की सावलकोट जलविद्युत परियोजना को मंजूरी देकर एक बड़ा रणनीतिक कदम उठाया है। यह परियोजना लंबे समय से अटकी हुई थी, लेकिन अब केंद्र सरकार ने इसे पर्यावरणीय स्वीकृति प्रदान कर दी है। इस मंजूरी को पाकिस्तान के खिलाफ भारत की जल-नीति में निर्णायक मोड़ माना जा रहा है।
इस परियोजना को विशेषज्ञ पर्यावरण मूल्यांकन समिति (EAC) ने 26 सितंबर को सिफारिश की थी, जबकि अंतिम मंजूरी 9 अक्टूबर 2025 को दी गई। यह परियोजना सिंधु जल संधि के निलंबन के बाद भारत की नदियों पर बढ़ती नियंत्रण नीति का हिस्सा है। इस कदम के जरिए भारत यह संकेत दे रहा है कि अब वह पानी से जुड़ी रियायतों को सीमित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
परियोजना की विशेषताएं
सावलकोट परियोजना चेनाब बेसिन में भारत की सबसे बड़ी जलविद्युत योजनाओं में से एक है। इसमें 192.5 मीटर ऊंचा गुरुत्व बांध और लगभग 1,100 हेक्टेयर में फैला विशाल जलाशय बनाया जाएगा। इसके दो चरणों में कुल 1,856 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है — पहले चरण में 1,406 मेगावाट और दूसरे में 450 मेगावाट।
इस परियोजना से जम्मू-कश्मीर की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ भारत को पश्चिमी नदियों के अपने हिस्से के पानी का पूर्ण उपयोग करने में मदद मिलेगी। यह भारत की 1960 की संधि के तहत अपने अधिकारों को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
सुरक्षा और रणनीतिक दृष्टिकोण
गृह मंत्रालय (MHA) ने इस परियोजना को ‘रणनीतिक महत्व’ का बताते हुए पर्यावरण मंत्रालय से शीघ्र मंजूरी देने का अनुरोध किया था। यह निर्णय उस समय आया है जब 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद भारत अब सिंधु, झेलम और चिनाब नदियों पर अपने बुनियादी ढांचे का विकास स्वतंत्र रूप से कर सकता है।
पर्यावरणीय पहलू
सावलकोट परियोजना के तहत लगभग 847.17 हेक्टेयर वन भूमि का उपयोग किया जाएगा, जिसके लिए 2.22 लाख से अधिक पेड़ों की कटाई करनी होगी। इनमें से 1.26 लाख पेड़ केवल रामबन जिले में स्थित हैं। वन सलाहकार समिति (FAC) ने जुलाई में इस परियोजना को छूट प्रदान की थी, क्योंकि इसके लिए संचयी अध्ययन पहले ही 2013 के दिशानिर्देशों के अनुसार किए जा चुके हैं।
पाकिस्तान पर असर
यह मंजूरी भारत की उस नीति को रेखांकित करती है जिसके तहत वह सिंधु जल संधि के दायरे से बाहर निकलकर अपने संसाधनों पर अधिक नियंत्रण चाहता है। इस कदम से पाकिस्तान पर कूटनीतिक और जल-आधारित दबाव दोनों बढ़ेंगे, क्योंकि सावलकोट जैसी परियोजनाएं भारत को जल प्रबंधन में अधिक शक्ति प्रदान करेंगी।
सावलकोट जलविद्युत परियोजना केवल एक बिजली उत्पादन योजना नहीं, बल्कि भारत की रणनीतिक, पर्यावरणीय और कूटनीतिक नीतियों का संतुलित प्रतीक है। इसके पूरा होने पर न केवल जम्मू-कश्मीर की ऊर्जा व्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि यह भारत की जल-संप्रभुता को भी सुदृढ़ करेगी।