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आरक्षित वर्गों में बढ़ती असमानता पर बोले शांता कुमार — “क्रीमीलेयर की नई समीक्षा समय की मांग”

शिमला/18/11/2025

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शिमला। पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता शांता कुमार ने आरक्षण व्यवस्था में उभर रही गहरी असमानताओं पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई द्वारा क्रीमीलेयर प्रणाली पर उठाए गए सवाल सामाजिक न्याय के लिए महत्वपूर्ण संकेत हैं और इस मुद्दे पर देश को अब गंभीरता से पुनर्विचार करना चाहिए।

शांता कुमार के अनुसार आरक्षित वर्गों में लंबे समय से एक समस्या बढ़ती जा रही है—कुछ प्रभावशाली परिवार लगातार आरक्षण का लाभ उठाकर आर्थिक रूप से बहुत समृद्ध हो चुके हैं, जबकि उसी समुदाय के गरीब परिवार आज भी किसी लाभ से वंचित हैं। उन्होंने कहा कि कई गांवों में स्थिति यह है कि एक ही परिवार के कई सदस्य सरकारी नौकरियों में पहुंच चुके हैं, पर उसी गांव की उसी जाति की कमजोर परिवारों तक आज तक कोई अवसर नहीं पहुंच पाया। इससे आरक्षण की मूल भावना कमजोर हो रही है और वास्तविक जरूरतमंद पीछे छूट रहे हैं।

उन्होंने याद दिलाया कि हिमाचल और राजस्थान में शुरू की गई अन्त्योदय योजना ने एक समय इस समस्या को काफी हद तक खत्म कर दिया था। उस व्यवस्था में उन परिवारों को प्राथमिकता दी जाती थी जिन्हें पहले कभी किसी योजना का लाभ नहीं मिला, जिससे क्रीमीलेयर की जटिलता अपने आप कम हो गई थी।

शांता कुमार का कहना है कि देश आर्थिक रूप से आगे बढ़ रहा है, लेकिन सामाजिक न्याय का लक्ष्य अभी अधूरा है। समाज में अमीर-गरीब के बीच की खाई बढ़ रही है और कई कमजोर वर्गों तक विकास का लाभ पर्याप्त रूप से नहीं पहुंच पा रहा। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि आरक्षित वर्गों में क्रीमीलेयर की पहचान को अधिक पारदर्शी और न्यायपूर्ण बनाया जाए, ताकि सबसे अधिक जरूरतमंद लोगों को प्राथमिकता मिल सके।

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