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शिमला में 34 वर्षीय महिला की स्क्रब टायफस से मौत, स्वास्थ्य विभाग अलर्ट

ijmc shimla

शिमला: हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) में 34 वर्षीय महिला की स्क्रब टायफस से मौत हो गई। महिला जिला शिमला के जुब्बल क्षेत्र की रहने वाली थी और अस्पताल में उसका इलाज चल रहा था। घटना के बाद अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गए हैं। विभाग ने सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) को निर्देश दिए हैं कि अगर किसी मरीज को तेज बुखार के साथ शरीर पर लाल दाने दिखें तो तुरंत स्क्रब टायफस का टेस्ट करवाया जाए। आईजीएमसी के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. राहुल रॉव ने बताया कि अस्पताल में तेज बुखार वाले मरीजों की जांच की जा रही है और लोगों को इस बीमारी के प्रति जागरूक रहने की आवश्यकता है।

बरसात के मौसम में स्क्रब टायफस के मामले तेजी से बढ़ जाते हैं, खासकर जुलाई और अगस्त के महीनों में। बारिश के कारण घास और खरपतवार अधिक उग जाते हैं, जिससे संक्रमित पिस्सुओं के संपर्क में आने का खतरा बढ़ जाता है। यह पिस्सू खेतों, झाड़ियों और घास-फूस में पाए जाने वाले चूहों में पनपते हैं और काटने पर बैक्टीरिया रिकिटेशिया को शरीर में पहुंचा देते हैं, जिससे तेज बुखार, जोड़ों में दर्द, कंपकंपी, शरीर में अकड़न और कभी-कभी गर्दन, बाजू के नीचे या कूल्हों के ऊपर गिल्टियां बनने लगती हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि स्क्रब टायफस से बचाव के लिए घर और आसपास सफाई रखें, घास-खरपतवार न उगने दें, कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करें और खेतों में काम करते समय शरीर को पूरी तरह ढककर रखें। समय पर इलाज न मिलने पर यह बीमारी जानलेवा साबित हो सकती है, लेकिन यह एक गैर-संक्रामक रोग है और साफ-सफाई व सावधानी से इसकी रोकथाम संभव है।

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