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शिमला: दलित बच्चे की मौत पर SC आयोग ने पुलिस से मांगी रिपोर्ट

शिमला/02/10/2025

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शिमला: हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के उपमंडल रोहड़ू की तहसील चिड़गांव के गांव लिम्ब्डा में 12 वर्षीय दलित बालक की मौत ने पूरे क्षेत्र में गहरी संवेदना और आक्रोश पैदा कर दिया है। इस मामले पर हिमाचल प्रदेश अनुसूचित जाति आयोग ने कड़ा संज्ञान लेते हुए पुलिस विभाग को तीन दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। आयोग की बैठक शिमला स्थित विल्लिज पार्क में आयोजित हुई, जिसमें विभिन्न अनुसूचित जाति संगठनों के प्रतिनिधि भी मौजूद थे।

मामले की पृष्ठभूमि:

जानकारी के अनुसार, यह घटना उपतहसील जांगला के गांव लिम्ब्डा में हुई। बच्चे की मां ने आरोप लगाया कि गांव की तीन महिलाओं ने उसके बेटे को पीटकर गौशाला में बंद कर दिया। आरोपी महिलाओं ने यह कार्रवाई इसलिए की क्योंकि बालक ने उनके घर को छू लिया था। इससे आहत होकर बच्चे ने जहर खा लिया और 17 सितंबर को उसकी मौत हो गई। शुरुआती एफआईआर में मामला आत्महत्या के लिए उकसाने का दर्ज किया गया था।

आयोग की प्रतिक्रिया:

अध्यक्ष कुलदीप कुमार धीमान ने कहा कि पुलिस को प्रारंभिक चरण में ही मामला एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज करना चाहिए था। अधिनियम के अंतर्गत मामला न दर्ज होने के कारण आरोपी को हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत मिल गई, जो अत्यंत गंभीर और चिंतनीय है।

अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी और पीड़ित परिवार को विधिक प्रावधानों के अनुरूप मुआवजा उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि समाज में व्याप्त कुरीतियों को समाप्त करने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।

आयोग ने पुलिस विभाग को अन्य संलिप्त व्यक्तियों की गहन जांच करने और पीड़ित परिवार को सुरक्षा प्रदान करने के निर्देश भी दिए। अध्यक्ष ने यह भी बताया कि मुख्यमंत्री स्वयं इस मामले पर संज्ञान ले चुके हैं और दोषियों को न्याय के कटघरे में लाने हेतु ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

महिला के खिलाफ मामला दर्ज:

डीआईजी (कानून एवं व्यवस्था) रंजना चौहान ने बताया कि एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। डीएसपी रोहड़ू मामले की जांच कर रहे हैं। महिला पुष्पा देवी को नामजद किया गया है और अन्य आरोपियों की पहचान जांच के आधार पर की जा रही है।

आयोग की सतत निगरानी:

आयोग ने कहा कि प्रदेशभर में ऐसे मामलों की निरंतर निगरानी की जा रही है। कोई भी व्यक्ति सीधे आयोग के ईमेल hpstatecommisionforsc@gmail.com पर शिकायत दर्ज कर सकता है। आयोग के सदस्य विजय डोगरा और सदस्य दिग्विजय मल्होत्रा ने कहा कि दोषियों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

यह घटना दलित समाज के प्रति भेदभाव और कुरीतियों को उजागर करती है। आयोग ने इसे अत्यंत गंभीर और चिंतनीय बताया है।

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