शिमला हाईकोर्ट सख्त: संजौली की बंगाला कॉलोनी से अवैध कब्जे हटाने की जिम्मेदारी नगर निगम को सौंपी
शिमला/11/10/2025
शिमला: राजधानी शिमला के संजौली क्षेत्र की बंगाला कॉलोनी में अवैध कब्जों को लेकर हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है। अदालत ने स्पष्ट आदेश दिए हैं कि अवैध निर्माण और कब्जे हटाने की जिम्मेदारी अब नगर निगम शिमला की होगी। कोर्ट ने कहा है कि इस कार्रवाई में किसी भी प्रकार की देरी या बाधा नहीं होनी चाहिए।
मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायमूर्ति जिया लाल भारद्वाज की खंडपीठ ने डीसी शिमला के हलफनामे और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद पाया कि बंगाला कॉलोनी में सार्वजनिक और वन भूमि पर अतिक्रमण किया गया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि याचिका लंबित रहने के बावजूद संबंधित अधिकारी कब्जाधारियों पर कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र हैं।
दरअसल, हाईकोर्ट को इस क्षेत्र में अतिक्रमण और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने की शिकायत पत्र के रूप में मिली थी, जिसे जनहित याचिका में परिवर्तित किया गया। रिपोर्ट में बताया गया कि कॉलोनी में ग्रीन एरिया में सीमेंट का उपयोग, देवदार पेड़ों को नुकसान, और वन भूमि पर कचरा जलाने जैसे मामले सामने आए हैं। साथ ही सार्वजनिक पैदल मार्गों पर कब्जा और गंदे पानी की निकासी खुले में करने जैसी शिकायतें भी की गईं।
कोर्ट ने स्थिति की गंभीरता देखते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव को क्षेत्र का निरीक्षण कर फोटोग्राफिक रिपोर्ट पेश करने को कहा था। अब उस रिपोर्ट के आधार पर हाईकोर्ट ने नगर निगम को साफ निर्देश दिए हैं कि वह अवैध कब्जे तत्काल हटाने की कार्रवाई करे।
वहीं, हाईकोर्ट ने एक अन्य मामले में शिमला स्थित ब्रह्मो समाज मंदिर ट्रस्ट की संपत्तियों पर यथास्थिति बनाए रखने के भी आदेश दिए हैं। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि मंदिर से संबंधित संपत्तियों पर कानून व्यवस्था और शांति बनी रहे।
यह आदेश उस याचिका के बाद आया जिसमें ब्रह्मो समाज के अनुयायियों ने मंदिर में प्रवेश और धार्मिक गतिविधियों की अनुमति की मांग की थी। हाईकोर्ट ने पहले ही उन्हें विवाद को दीवानी अदालत में ले जाने की अनुमति दी थी, जिसे अब खंडपीठ ने बरकरार रखा है।
अदालत के इन आदेशों से स्पष्ट है कि शिमला में अतिक्रमण और धार्मिक संपत्तियों से जुड़े विवादों पर अब न्यायपालिका कड़ा रुख अपना रही है।