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शिमला मेयर का कार्यकाल बढ़ाने के मामले में हाईकोर्ट सख्त, सरकार और चुनाव आयोग को भेजा नोटिस

शिमला/04/11/2025

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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने शिमला नगर निगम के मेयर सुरेंद्र चौहान के कार्यकाल को ढाई साल से बढ़ाकर पाँच साल करने के राज्य सरकार के फैसले पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार, राज्य चुनाव आयोग और मेयर सुरेंद्र चौहान को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

यह जनहित याचिका अधिवक्ता अंजलि सोनी वर्मा ने दायर की है। याचिकाकर्ता का कहना है कि मेयर का कार्यकाल बढ़ाने का निर्णय हिमाचल प्रदेश नगर निगम अधिनियम के सेक्शन 36 के विपरीत है। कानून के अनुसार मेयर और डिप्टी मेयर का कार्यकाल ढाई वर्ष निर्धारित है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि सरकार ने अध्यादेश जारी कर इस नियम को बदल दिया, जो संविधान और कानून के अनुरूप नहीं है।

याचिका में एक और महत्वपूर्ण पहलू रखा गया है— इस बार रोस्टर के तहत मेयर पद महिला पार्षद के लिए आरक्षित था। ऐसे में वर्तमान मेयर के कार्यकाल को बढ़ाने से नगर निगम की 21 महिला पार्षदों के अधिकारों पर सीधा असर पड़ा है, क्योंकि कार्यकाल बढ़ जाने से नए चुनाव की संभावना समाप्त हो गई और पद महिला उम्मीदवार तक नहीं पहुंच सका।

इस निर्णय का विरोध निगम की बैठक में भी देखने को मिला था। कई पार्षदों ने आपत्ति जताते हुए कहा था कि नियमों के अनुसार इस बार महिला मेयर चुनी जानी चाहिए थी, लेकिन सरकार ने अध्यादेश के जरिए रोस्टर को दरकिनार कर दिया। इसमें भाजपा पार्षदों के साथ-साथ कुछ कांग्रेस पार्षद भी शामिल थे।

हाईकोर्ट ने इस विवाद पर प्रारंभिक सुनवाई के बाद सभी पक्षों से जवाब मांगा है। अदालत यह जानना चाहती है कि सरकार ने यह अध्यादेश किन परिस्थितियों में जारी किया और इसके पीछे कानूनी तर्क क्या हैं।

अब पूरे प्रदेश में नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आगे कोर्ट का फैसला क्या रूप लेगा। यदि कोर्ट इस अध्यादेश को अवैध करार देता है, तो मेयर पद के लिए रोस्टर के अनुसार नया चुनाव भी संभव है। यह मामला शिमला नगर निगम की राजनीति के साथ-साथ महिला प्रतिनिधित्व और प्रशासनिक पारदर्शिता का भी अहम मुद्दा बन गया है।

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