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शिमला: रंगड़ों के झुंड का हमला, एक की मौत, दो महिलाएं घायल

शिमला/03/10/2025

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शिमला जिले के रामपुर उपमंडल के जुली गांव में बुधवार शाम एक दर्दनाक हादसा हुआ। खेतों में घास काट रहे तीन ग्रामीणों पर अचानक रंगड़ों के झुंड ने हमला कर दिया, जिसमें 48 वर्षीय कोक चंद की मौत हो गई, जबकि उनकी पत्नी मीना देवी और गांव की महिला संतू देवी घायल हो गईं।

घटना का विवरण

घटना बुधवार शाम लगभग 5 बजे हुई, जब कोक चंद अपनी पत्नी और संतू देवी के साथ खेतों में घास काट रहे थे। घास काटने के बाद तीनों उसे एक पेड़ के पास रख रहे थे कि तभी पेड़ पर बने छत्ते से सैकड़ों रंगड़ उन पर टूट पड़े।

डंक लगने के बाद तीनों ने भागकर जान बचाने की कोशिश की, लेकिन गंभीर रूप से घायल हो गए। परिजन तुरंत उन्हें खनेरी अस्पताल ले गए, जहां इलाज के दौरान कोक चंद की मौत हो गई। अस्पताल प्रशासन ने पुलिस को घटना की सूचना दी।

डीएसपी नरेश शर्मा ने बताया कि मृतक के शरीर पर बाहरी चोट के निशान नहीं थे, लेकिन रंगड़ों के डंक के निशान, लाल-नील धब्बे और सूजन पाई गई। शव का पोस्टमॉर्टम करवाने के बाद अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को सौंप दिया गया। इस घटना के बाद गांव में शोक की लहर दौड़ गई।

रंगड़ क्या हैं?

रंगड़ एक प्रकार का कीट होता है, जिसे भारत में ततैया, बरैया, गंधेली आदि नामों से भी जाना जाता है। वैज्ञानिक दृष्टि से यह हायमेनोप्टेरा गण और आपोक्रिटा उपगण का कीट है। कुछ रंगड़ जातियां छत्तों में रहती हैं, जिनमें एक अंडे देने वाली रानी होती है और बाकी कर्मी होती हैं। अकेले रहने वाले रंगड़ अन्य कीटों को डंक मारकर उनके शरीर में अंडे देते हैं, जिससे उनके शिशु उस कीट को खा जाते हैं। कृषि में कई कीटों को नियंत्रित करने में रंगड़ों का महत्व होता है।

क्यों हैं रंगड़ जानलेवा?

आईजीएमसी शिमला के मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. उशेन्द्र शर्मा ने बताया कि रंगड़ मधुमक्खी की प्रजाति के बड़े कीट होते हैं और झुंड में चलते हैं। एक या दो रंगड़ का काटना कम खतरनाक होता है, लेकिन जब झुंड में रंगड़ गले और चेहरे पर हमला करते हैं, तो डंक से शरीर में टॉक्सिन बनता है, जो जानलेवा हो सकता है।

रंगड़ों के डंक से दर्द, जलन और सूजन होती है। इनके जहर का असर शरीर में फैलकर किडनी और अन्य अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए रंगड़ों के हमले में तुरंत इलाज आवश्यक है।

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