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शिमला की सड़कों पर ‘जाम का साया’: रोज़ाना घंटों फंसे रहते लोग, प्रशासन की योजनाएँ नाकाम

शिमला/29/10/2025

shimla jam

राजधानी शिमला में ट्रैफिक जाम अब लोगों के धैर्य की परीक्षा बन चुका है। हर दिन, खासकर सुबह स्कूल और ऑफिस के समय, शहर के मुख्य मार्गों पर वाहनों की लंबी कतार लग जाती है। स्थिति यह है कि लोग बस से उतरकर पैदल चलना अधिक सही समझते हैं, ताकि समय पर स्कूल या दफ्तर पहुंच सकें।

बालूगंज से बस स्टैंड, लक्कड़बाजार से विक्ट्री टनल, संजौली से छोटा शिमला और 103 से विधानसभा—ये सभी रूट पीक आवर्स में जाम से बेहाल रहते हैं। प्रशासन कई बार नए ट्रैफिक प्लान लागू कर चुका है, लेकिन जाम कम होने के बजाय बढ़ता जा रहा है।

लोगों का कहना है कि यदि वे घर से समय से पहले भी निकलें, तो भी जाम में फंसने से देरी हो ही जाती है। बस चालकों और कंडक्टरों ने बताया कि चौड़ा मैदान की ओर से आने वाले भारी ट्रैफिक के कारण वाहनों की रफ्तार बेहद धीमी पड़ जाती है।

जाम की सबसे बड़ी वजह — पार्किंग व्यवस्था की कमी


स्थानीय निवासियों का कहना है कि शिमला में उचित पार्किंग न होने के कारण सड़कें संकरी हो जाती हैं, क्योंकि वाहन चालक सड़क किनारे ही गाड़ियाँ खड़ी कर देते हैं। इससे सड़क का एक बड़ा हिस्सा वाहनों की आवाजाही के लिए नहीं बचता और जाम की स्थिति बन जाती है।

प्रशासन की कोशिशें, लेकिन राहत नहीं

ट्रैफिक पुलिस रोज तैनात रहती है, प्रशासन वैकल्पिक ट्रैफिक प्लान भी बनाता है, लेकिन स्थायी समाधान की कमी से समस्या जस की तस बनी हुई है।

लोगों की मांग है कि जल्द से जल्द

मल्टी लेवल पार्किंग विकसित की जाए

सड़क किनारे गाड़ी पार्क करने पर सख्त कार्रवाई हो

ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम मजबूत किया जाए

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जाम केवल असुविधा नहीं, बल्कि समय और ऊर्जा की बर्बादी है, इसलिए इस समस्या के समाधान में देरी नहीं होनी चाहिए।

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