बिजली कटौती से उद्योगपति परेशान, उत्पादन हो रहा प्रभावित
सोलन। 15/08/2025
सोलन। बीबीएन, परवाणू समेत सोलन जिले के अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में चल रही अनियोजित बिजली कटौती ने उद्योगपतियों की परेशानी बढ़ा दी है। करोड़ों रुपये के कारोबार पर असर पड़ रहा है और उत्पादन ठप होने से उद्यमी भारी नुकसान झेल रहे हैं। कई उद्योगपति समय पर अपने सप्लाई ऑर्डर पूरे नहीं कर पा रहे, जिससे न केवल आर्थिक क्षति हो रही है, बल्कि ग्राहकों का विश्वास भी डगमगाने लगा है।
उद्योगपतियों का कहना है कि बिजली कटौती का असर बड़े पैमाने पर महसूस किया जा रहा है। अक्सर बिना पूर्व सूचना के बिजली आपूर्ति रोक दी जाती है, जिससे उत्पादन इकाइयां बंद हो जाती हैं और मशीनों के ठप पड़ने से समय और श्रम दोनों की बर्बादी होती है। कई बार बिजली कटौती के बाद सप्लाई बहाल होने में आधा घंटा या उससे अधिक समय लग जाता है, जिससे उत्पादन की गति फिर से पकड़ने में मुश्किल आती है।
फार्मा उद्योग सबसे ज्यादा प्रभावित
बीबीएन उद्योग संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि फार्मा सेक्टर के उद्योगों को सबसे अधिक नुकसान हो रहा है। दवाओं के उत्पादन में मशीनरी को एक निश्चित तापमान और समय के हिसाब से चलाना पड़ता है, लेकिन अचानक बिजली जाने से बैच खराब हो जाते हैं और पूरा स्टॉक बेकार हो जाता है। इसके अलावा पैकेजिंग और सप्लाई चैन भी बाधित हो रही है।
बिजली बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार, हाल ही में हुई भारी बारिश के कारण कई जगहों पर ट्रांसफॉर्मर और बिजली लाइनों में तकनीकी खराबी आई है। बीबीएन, नालागढ़, बरोटीवाला, परवाणू और आस-पास के औद्योगिक क्षेत्रों में चार से छह घंटे तक बिजली कटौती की घटनाएं दर्ज की गई हैं।
उद्योगपतियों ने बिजली बोर्ड को समस्या से अवगत करवाया है, लेकिन अभी तक स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। उनका कहना है कि अगर इसी तरह बिजली कटौती जारी रही तो बड़े ऑर्डर पूरे करना मुश्किल हो जाएगा और विदेशी ग्राहक भी भरोसा खो देंगे।
रोजगार पर भी पड़ रहा असर
औद्योगिक इकाइयों में उत्पादन प्रभावित होने से श्रमिकों को भी परेशानी हो रही है। कई यूनिट्स में श्रमिकों को समय से पहले घर भेजना पड़ रहा है, जिससे उनकी मजदूरी में भी कटौती हो रही है।
बीबीएन उद्योग संघ के अध्यक्ष राहुल गर्ग और अन्य पदाधिकारियों ने राज्य सरकार और बिजली बोर्ड से मांग की है कि औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली कटौती की समस्या का स्थायी समाधान किया जाए। साथ ही, तकनीकी खराबी की स्थिति में वैकल्पिक बिजली आपूर्ति की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि उत्पादन पर असर न पड़े।