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सोनम वांगचुक के समर्थन में उतरे हिमाचल के मंत्री, केंद्र सरकार पर साधा निशाना

शिमला/28/09/2025

jagat negi

शिमला: हिमाचल प्रदेश के राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने क्लाइमेट एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक और लद्दाख के आंदोलन का समर्थन किया है। नेगी ने कहा कि लद्दाख के लोग और सोनम वांगचुक सिर्फ अपने संवैधानिक अधिकारों की मांग कर रहे हैं, लेकिन केंद्र सरकार और स्थानीय प्रशासन इस आवाज को दबाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि लेह-लद्दाख में पुलिस राज स्थापित कर दिया गया है और भाजपा दमनकारी नीतियों के तहत काम कर रही है।

नेगी ने कहा, “भाजपा पूरे देश में विपक्ष को दबाने के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का इस्तेमाल हथियार की तरह कर रही है। सोनम वांगचुक और लद्दाख के लोग केवल अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं, लेकिन इस आवाज को दबाना देश की एकता और अखंडता के लिए खतरनाक है। केंद्र सरकार ने लद्दाख के लोगों के साथ विश्वासघात किया है और लेह-लद्दाख की स्थिति चिंताजनक और दुखद है।”

गौरतलब है कि लद्दाख को राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर हुए हालिया प्रदर्शनों के दौरान चार लोगों की मौत हो गई और 90 लोग घायल हो गए। इसके बाद प्रशासन ने एहतियातन लेह क्षेत्र में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद कर दीं। विरोध प्रदर्शनों के बीच शुक्रवार को पुलिस ने जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को गिरफ्तार कर लिया।

सोनम वांगचुक पिछले पांच वर्षों से लेह एपेक्स बॉडी (एलएबी) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (केडीए) के साथ मिलकर आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं। यह आंदोलन 2019 में जम्मू-कश्मीर से अलग कर लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने के बाद से चल रहा है।

इस बीच, मंत्री जगत सिंह नेगी ने हिमाचल प्रदेश सरकार की उपलब्धियां भी साझा कीं। उन्होंने बताया कि हिमाचल मंत्रिमंडल ने अब तक 1,087 निर्णय लिए, जिनमें से 1,039 को जनवरी 2023 से जून 2025 के बीच सफलतापूर्वक लागू किया गया है। साथ ही हिमाचल प्रदेश कृषि उद्योग निगम लिमिटेड (एचपीएआईसी) ने पांच महीनों में 33 करोड़ रुपये का कारोबार और 93.34 लाख रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया है।

वहीं, गृह मंत्रालय ने लेह में हुई हिंसा के लिए सोनम वांगचुक को जिम्मेदार ठहराया है। मंत्रालय का कहना है कि उनके भड़काऊ बयानों से प्रेरित होकर लोगों ने हिंसक प्रदर्शन किया। वांगचुक भूख हड़ताल पर थे, हालांकि बाद में उन्होंने इसे वापस ले लिया।

एक ओर गृह मंत्रालय वांगचुक को जिम्मेदार मान रहा है, तो दूसरी ओर हिमाचल सरकार के मंत्री उनके पक्ष में खुलकर सामने आ रहे हैं।

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