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कफ सिरप से बच्चों की मौत पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका खारिज

नई दिल्ली/10/10/2025

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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र में जहरीले कफ सिरप से हुई बच्चों की मौतों की सीबीआई जांच की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) शुक्रवार को खारिज कर दी। भारत के मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया।

क्या थी याचिका की मांग:

अधिवक्ता विशाल तिवारी द्वारा दायर की गई इस जनहित याचिका में दावा किया गया था कि जहरीले कफ सिरप के सेवन से कई बच्चों की मौत हुई है और इस मामले की निष्पक्ष जांच केवल सीबीआई जैसी केंद्रीय एजेंसी से ही संभव है। याचिकाकर्ता ने कहा कि यह कोई पहला मामला नहीं है, जब मिलावटी दवाओं से बच्चों की जान गई हो, इसलिए पूरे मामले की राष्ट्रीय स्तर पर जांच जरूरी है।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता का पक्ष:

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि संबंधित राज्य सरकारें जैसे तमिलनाडु, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र इस मामले में आवश्यक कार्रवाई कर रही हैं। उन्होंने कहा कि “राज्य अपने स्तर पर जांच कर रहे हैं और कार्रवाई भी हो रही है।”

सुप्रीम कोर्ट का रुख:

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई ने याचिकाकर्ता से पूछा कि उन्होंने अब तक कितनी जनहित याचिकाएं दाखिल की हैं। अधिवक्ता तिवारी ने बताया कि उन्होंने 8 से 10 याचिकाएं दाखिल की हैं। इसके बाद पीठ ने कहा कि इस मामले में पर्याप्त जांच पहले से चल रही है और किसी अलग एजेंसी की आवश्यकता नहीं है, इसलिए याचिका को खारिज कर दिया गया।

क्या कहा गया याचिका में:


याचिकाकर्ता ने दूषित कफ सिरप के निर्माण, विनियमन, परीक्षण और वितरण की व्यापक जांच की मांग की थी। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक राष्ट्रीय न्यायिक आयोग या विशेषज्ञ समिति गठित करने की भी अपील की गई थी, ताकि दवा सुरक्षा सुधारों की सिफारिश की जा सके।

याचिका में यह भी कहा गया था कि सितंबर की शुरुआत से अब तक कम से कम 14 बच्चों की मौत हो चुकी है, जिनमें से ज्यादातर मामले महाराष्ट्र के नागपुर और मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा से सामने आए हैं। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा कराए गए प्रयोगशाला परीक्षणों में यह पाया गया कि तमिलनाडु की श्रीसन फार्मा प्राइवेट लिमिटेड द्वारा निर्मित ‘कोल्ड्रिफ कफ सिरप’ में डायथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) पाया गया, जो एक जहरीला औद्योगिक विलायक (toxic industrial solvent) है और दवाओं में प्रयोग के लिए प्रतिबंधित है।

केंद्र और राज्यों की भूमिका पर उठे सवाल:

याचिका में आरोप लगाया गया कि भयावह निष्कर्षों के बावजूद केंद्र सरकार और केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने देशभर से कफ सिरप को तुरंत वापस मंगाने या उस पर प्रतिबंध लगाने में देरी की, जिससे जहरीली दवाओं का प्रसार जारी रहा।

विदेशी घटनाओं से भी जोड़ा गया मामला:

याचिका में गाम्बिया और उजबेकिस्तान की घटनाओं का भी हवाला दिया गया, जहां DEG-दूषित भारतीय कफ सिरप के कारण 90 से अधिक बच्चों की मौत हुई थी। याचिकाकर्ता ने कहा कि यह कोई संयोग नहीं बल्कि नियामक लापरवाही, उदासीनता और सिस्टम की विफलता है, जिसने नकली और मिलावटी दवाओं को सार्वजनिक बाजार में बेरोकटोक प्रवेश करने दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने सभी दलीलों को सुनने के बाद कहा कि राज्यों द्वारा पहले से जांच चल रही है और केंद्र सरकार ने भी कदम उठाए हैं, इसलिए इस मामले में CBI जांच की कोई आवश्यकता नहीं है।

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