उमर अब्दुल्ला का मोदी सरकार पर हमला: जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के साथ विश्वासघात
नई दिल्ली/29/09/2025
नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया है कि उसने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के साथ किए अपने वादों को पूरा नहीं किया और दोनों क्षेत्रों के साथ विश्वासघात किया। उन्होंने यह बातें वरिष्ठ पत्रकार और लेखिका हरिंदर बावेजा की पुस्तक "दे विल शूट यू, मैडम: माई लाइफ थ्रू कॉन्फ्लिक्ट" के विमोचन के अवसर पर कही।
अब्दुल्ला ने कहा कि केंद्र सरकार लद्दाख और जम्मू-कश्मीर के लिए अपने रोडमैप पर अमल करने में विफल रही है। लद्दाख को छठी अनुसूची देने का वादा चुनावी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए किया गया था, लेकिन यह असंभव था क्योंकि यह क्षेत्र चीन और पाकिस्तान की सीमाओं के पास है और यहां भारी सुरक्षा व्यवस्था की आवश्यकता है। इसके बावजूद चुनावी भागीदारी दिलाने के लिए वादे किए गए।
उन्होंने लद्दाखी नेताओं और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के प्रति केंद्र सरकार के अचानक बदलते रुख की भी आलोचना की। अब्दुल्ला ने कहा कि जिन लोगों को पहले प्रधानमंत्री की पर्यावरण योद्धा कहकर सराहा गया, उन्हें अब पाकिस्तानी कनेक्शन के आधार पर निशाना बनाया जा रहा है।
24 सितंबर को लद्दाख में संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने और राज्य का दर्जा देने की मांग के समर्थन में हुए विरोध प्रदर्शनों में हिंसा हुई, जिसमें चार लोगों की मौत हुई और कई घायल हुए। इसके बाद वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत हिरासत में लिया गया।
अब्दुल्ला ने कहा कि जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा देने की प्रक्रिया तीन चरणों में पूरी होनी थी—परिसीमन, चुनाव और अंत में राज्य का दर्जा। पहले दो चरण पूरे हो चुके हैं, लेकिन तीसरा चरण अभी तक पूरा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि हाल के चुनावों में भारी मतदान के बावजूद जनता का विश्वास कमजोर है।
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की हालिया टिप्पणियों का भी उल्लेख किया, जिसमें केंद्र से राज्य का दर्जा बहाल करने का आग्रह किया गया था, और कहा कि यह मामला कश्मीरियों के स्वामित्व और सम्मान का है, जमीन का नहीं।
इस अवसर पर पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह भी मौजूद थे। रोली बुक्स द्वारा प्रकाशित हरिंदर बावेजा की पुस्तक "दे विल शूट यू, मैडम" में संघर्ष क्षेत्रों और कठिन इलाकों की कहानियों को सामने लाने का प्रयास किया गया है, जिसमें पंजाब, जम्मू-कश्मीर, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के संघर्ष और जमीनी हकीकतों का वर्णन किया गया है।