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UNGA में तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन ने उठाया कश्मीर और गाजा का मुद्दा

न्यूयॉर्क/24/09/2025

kashmir

न्यूयॉर्क। तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तईप एर्दोगन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में मंगलवार को अपने संबोधन में कश्मीर मुद्दा और गाजा में इजराइल की कार्रवाई को प्रमुखता से उठाया। एर्दोगन ने कहा कि कश्मीर का मसला भारत और पाकिस्तान के बीच संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के अनुरूप बातचीत के जरिए हल किया जाना चाहिए। उन्होंने दोहराया कि तुर्की अपने कश्मीरी भाइयों और बहनों के हित में हमेशा संवाद और बातचीत के माध्यम से समाधान चाहता है। भारत ने बार-बार ऐसे बयानों को खारिज किया है और कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का आंतरिक मामला है।

एर्दोगन ने गाजा में इजराइल की कार्रवाई पर भी तीखा हमला किया। उन्होंने कहा, “गाजा में नरसंहार जारी है। निर्दोष लोग मर रहे हैं। आज मानवता के नाम पर उत्पीड़ित फिलिस्तीनियों के साथ खड़े होने का समय है। जिन देशों ने अभी तक फिलिस्तीन को मान्यता नहीं दी है, उन्हें तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।” उन्होंने उन देशों का धन्यवाद भी किया जिन्होंने फिलिस्तीन को पहले ही मान्यता दी है।

तुर्की के राष्ट्रपति ने इजराइल के हमास पर लक्षित हमलों की भी आलोचना की और कहा कि इससे कोई उद्देश्य हासिल नहीं हुआ। उन्होंने गाजा संघर्ष की मानवीय कीमत पर भी जोर दिया, बताते हुए कहा कि पिछले 23 महीनों में इजराइल ने गाजा में हर घंटे एक बच्चे को मार डाला है। यह केवल आंकड़े नहीं, बल्कि निर्दोष लोगों की मौत है।

एर्दोगन ने कहा कि अप्रैल में भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव के बाद संघर्ष का विराम हुआ, इसके लिए वे प्रसन्न हैं। उन्होंने विश्व नेताओं से अपील की कि कश्मीर मुद्दा संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के आधार पर, कश्मीरी लोगों के हित में बातचीत के जरिए हल किया जाए। उन्होंने अपने भाषण में तुर्की की दीर्घकालिक नीति दोहराई और कहा कि वह हमेशा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और कश्मीरी जनता की आकांक्षाओं के आधार पर शांति स्थापना का समर्थन करेगा।

एर्दोगन ने इजराइल और उसके सहयोगियों के लिए तीखे शब्दों का इस्तेमाल किया और कहा कि गाजा में नरसंहार को रोकने के लिए वैश्विक समुदाय को तुरंत कदम उठाने होंगे। उन्होंने सीरिया, ईरान, यमन, लेबनान और कतर में इजराइली हमलों की भी आलोचना की और कहा कि फिलिस्तीनियों के साथ मानवता के नाम पर खड़े होना आवश्यक है।

तुर्की के राष्ट्रपति का यह भाषण इस बात का संकेत है कि उनका ध्यान गाजा में मानवता की स्थिति और कश्मीर में शांति स्थापना दोनों पर केंद्रित है। उनका रुख पाकिस्तान के साथ एकजुटता और कश्मीर मुद्दे पर वार्ता के जरिए समाधान खोजने की नीति पर आधारित है।

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