अमेरिका-भारत व्यापार वार्ता से पिघली बर्फ, 50% टैरिफ विवाद सुलझने की उम्मीद
भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रहे टैरिफ वॉर को लेकर मंगलवार को अहम बैठक हुई, जिसमें दोनों देशों ने बातचीत को सकारात्मक करार दिया। सोमवार रात अमेरिकी असिस्टेंट यूएस ट्रेड रिप्रजेंटेटिव ब्रेंडन लिंच भारत पहुंचे थे और उन्होंने मंगलवार को अपने भारतीय समकक्ष राजेश अग्रवाल से मुलाकात की। यह मुलाकात खास मानी जा रही है क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 50% टैरिफ लगाने के बाद दोनों देशों के रिश्तों में खटास आ गई थी।
बैठक के बाद अमेरिकी दूतावास के प्रवक्ता ने कहा कि वार्ता रचनात्मक और सकारात्मक रही। वहीं, भारत सरकार ने भी बयान जारी कर बताया कि दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार के महत्व को स्वीकारते हुए बातचीत को सकारात्मक माना है। इस मुलाकात से संकेत मिल रहे हैं कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार संबंध दोबारा पटरी पर लौट सकते हैं।
गौरतलब है कि रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले भारतीय सामान पर अमेरिका ने 25% शुल्क और 25% अतिरिक्त जुर्माना लगाया था। इस फैसले के बाद किसी उच्च पदस्थ अमेरिकी अधिकारी की यह पहली भारत यात्रा रही। वाणिज्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि इस बैठक को छठे दौर की आधिकारिक वार्ता के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह आगे होने वाली वार्ता की तैयारी का हिस्सा है। अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत और अमेरिका साप्ताहिक आधार पर वर्चुअल चर्चा कर रहे हैं।
इस बैठक का सकारात्मक असर भारतीय रुपये पर भी देखने को मिला। मंगलवार को रुपये की मजबूती दर्ज की गई और यह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले आठ पैसे बढ़कर 88.08 प्रति डॉलर (अस्थायी) पर बंद हुआ। विदेशी मुद्रा कारोबारियों का कहना है कि कमजोर डॉलर और घरेलू बाजारों की मजबूती ने रुपये को सहारा दिया। अमेरिकी डॉलर फेडरल रिजर्व की आगामी बैठक और कमजोर आर्थिक आंकड़ों के चलते दो महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया।
स्पष्ट है कि भारत और अमेरिका के बीच हुई इस मुलाकात से टैरिफ वॉर खत्म होने की उम्मीदें बढ़ गई हैं। अगर आने वाले दौर में बातचीत सफल रहती है तो दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों में आई दरार भर सकती है और 50% टैरिफ विवाद का समाधान निकल सकता है।