उत्तराखंड में दिसंबर से लागू होगा ग्रीन सेस: बाहरी गाड़ियों को राज्य में प्रवेश से पहले देना होगा शुल्क
देहरादून/27/10/2025
देहरादून। उत्तराखंड सरकार पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक नई पहल शुरू करने जा रही है। दिसंबर 2025 से राज्य में प्रवेश करने वाले बाहरी वाहनों को अब “ग्रीन सेस” (Green Cess) देना होगा। इस फैसले के बाद उत्तराखंड देश का पहला राज्य बन जाएगा जहां पर्यावरण संरक्षण के नाम पर बाहरी गाड़ियों से शुल्क लिया जाएगा। सरकार को उम्मीद है कि इससे हर साल करीब 100 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह कदम पर्यावरण की रक्षा और प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में बड़ा बदलाव साबित होगा। उन्होंने कहा कि राज्य का लगभग 71 प्रतिशत भूभाग वन क्षेत्र से आच्छादित है, इसलिए पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी साझा करने की जरूरत है।
कैसे वसूला जाएगा ग्रीन सेस
राज्य की सीमाओं पर 37 एंट्री पॉइंट्स पर आधुनिक ऑटोमेटेड नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरे लगाए जा रहे हैं। ये कैमरे वाहन की नंबर प्लेट स्कैन कर उसके फास्टैग (FASTag) से निर्धारित राशि अपने आप काट देंगे। यह सेस 24 घंटे के लिए मान्य रहेगा और राशि सीधे राज्य सरकार के खाते में जाएगी।
मुख्यमंत्री के विशेष सचिव और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव पराग मधुकर धकाते ने बताया कि इस व्यवस्था से यातायात प्रभावित नहीं होगा और फास्टैग आधारित स्वचालित कटौती से पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और डिजिटल रहेगी।
वाहनों पर लगेगा इतना शुल्क
कारों से: ₹80
यात्री बसों से: ₹140
मालवाहक वाहनों से: ₹250
भारी वाहनों (10 टायर तक) से: ₹700
मुक्त श्रेणियां: एंबुलेंस, अग्निशमन वाहन, इलेक्ट्रिक और CNG वाहन, टू-व्हीलर
कहां खर्च होगा यह पैसा
ग्रीन सेस से मिलने वाला राजस्व पर्यावरण संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण, सड़क सुरक्षा और शहरी परिवहन सुधार जैसे क्षेत्रों में उपयोग किया जाएगा। सरकार का दावा है कि यह नीति न केवल राजस्व बढ़ाएगी बल्कि पर्यावरणीय स्थिरता और पारदर्शिता को भी मजबूत करेगी।
आरटीओ देहरादून संदीप सैनी के अनुसार, यह शुल्क राज्य में प्रवेश करते ही लागू होगा और एक बार भुगतान के बाद 24 घंटे तक वैध रहेगा। अगर वाहन दोबारा प्रवेश करेगा तो नया सेस देना होगा।
पर्यावरण और राजस्व – दोहरा लाभ
उत्तराखंड सरकार का मानना है कि यह कदम राज्य की आर्थिक स्थिति को मजबूती देगा और साथ ही पर्यावरणीय जिम्मेदारी को साझा करने की दिशा में एक मिसाल बनेगा।
राज्य स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने पर सरकार की यह पहल “हर पर्यटक और यात्री को पर्यावरण संरक्षण में सहभागी बनाने” की दिशा में ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।