विनय कुमार की ताजपोशी से बदला कांग्रेस का पावर संतुलन, होलीलॉज कैंप को मिला बड़ा अधिमान
शिमला/23/11/2025
हिमाचल प्रदेश कांग्रेस में लंबे समय से चल रही खींचतान और अध्यक्ष पद को लेकर बनी असमंजस की स्थिति के बीच आखिरकार पार्टी हाईकमान ने नया फैसला लेकर संगठन में स्थिरता लाने की कोशिश की है। श्रीरेणुकाजी से विधायक और स्व. वीरभद्र सिंह के करीबी माने जाने वाले विनय कुमार को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नियुक्त करके हाईकमान ने यह साफ संकेत दे दिया है कि संगठन आज भी होलीलॉज परिवार की पकड़ और राजनीति को अनदेखा नहीं कर सकता। महीनों से दो गुटों—सुक्खू कैंप और वीरभद्र समर्थक होलीलॉज कैंप—के बीच शक्ति संघर्ष जारी था, और इसी खींचतान के चलते अध्यक्ष पद का निर्णय बार-बार टलता रहा। अंततः दिल्ली में होलीलॉज गुट की एकजुटता, डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री की पैरवी और विनय कुमार के अनुभव ने उनके नाम को सबसे आगे कर दिया।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने अध्यक्ष पद के लिए अपने दो करीबी विधायकों, कसौली के सुल्तानपुरी और भोरंज के सुरेश कुमार के नाम हाईकमान को सुझाए थे, लेकिन संगठनात्मक मजबूती, क्षेत्रीय प्रभाव और होलीलॉज कैंप की राजनीतिक ताकत को देखते हुए हाईकमान ने सुक्खू की पसंद को प्राथमिकता नहीं दी। यह फैसला एक प्रकार से संगठन और सरकार के बीच संतुलन बनाने का प्रयास भी माना जा रहा है—सरकार सुक्खू के हाथ में रहेगी और संगठन का संचालन वीरभद्र समर्थक खेमे को सौंपा गया है। इस कदम से कांग्रेस ने यह भी संकेत दिया है कि वीरभद्र परिवार का राजनीतिक प्रभाव आज भी हिमाचल की कांग्रेस राजनीति की रीढ़ बना हुआ है।
हाईकमान के इस निर्णय के पीछे सामाजिक समीकरणों की गणना भी एक अहम कारक थी। विनय कुमार एससी समुदाय से आते हैं और शिमला संसदीय क्षेत्र में लगभग 27 प्रतिशत एससी आबादी है, जिसे देखते हुए आने वाले 2027 के विधानसभा चुनावों और 2029 के लोकसभा चुनावों के लिए यह कदम राजनीतिक तौर पर लाभदायक माना जा रहा है। एससी समुदाय के बड़े वोट बैंक को साधने के लिए कांग्रेस लंबे समय से एक रणनीतिक कदम की तलाश में थी और विनय की ताजपोशी उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय है। राजनीतिक अनुभव की बात करें तो विनय कुमार कांग्रेस संगठन में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं। वे तीन बार विधायक रह चुके हैं, वीरभद्र सरकार में मुख्य संसदीय सचिव भी रहे और लगभग तीन साल तक प्रदेश कांग्रेस के वर्किंग प्रेज़िडेंट रहे। हाल ही में उन्होंने विधानसभा उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा देकर संगठन की नई जिम्मेदारी संभालने का रास्ता साफ किया।
अब विनय कुमार के सामने असली चुनौती हिमाचल कांग्रेस के बिखरे हुए संगठन को फिर से मजबूत करना है। पिछले एक वर्ष से संगठन गुटबाजी, असंतोष और निष्क्रियता की स्थिति में है, जिससे कार्यकर्ता भी निराश हुए हैं। इस पृष्ठभूमि में विनय कुमार को संगठन को एकजुट करना, फील्ड में ऊर्जा लाना और अगले दो महीनों में होने वाले पंचायत चुनावों की तैयारियों को गति देना सबसे बड़ी परीक्षा होगी। यह भी देखना होगा कि वे संगठन और सरकार के बीच चल रही खींचतान को कितनी कुशलता से कम कर पाते हैं। फिलहाल पार्टी हाईकमान का यह कदम संतुलन साधने, संगठन को दिशा देने और आगामी चुनावों के लिए एक बड़े समुदाय के समर्थन को जोड़ने की स्पष्ट रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।