विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस: देश में हर 10वां व्यक्ति मानसिक रोग से पीड़ित
दिल्ली के बड़े अस्पतालों में मिल रही हैं आधुनिक इलाज की सुविधाएं
नई दिल्ली/10/10/2025
नई दिल्ली: देश और दुनिया में मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। डिप्रेशन, तनाव और चिंता जैसे विकारों ने लोगों के जीवन को गहराई से प्रभावित किया है। इन्हीं समस्याओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए हर साल 10 अक्टूबर को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस (World Mental Health Day) मनाया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि बदलती जीवनशैली, पारिवारिक ढांचों में परिवर्तन, काम का बढ़ता दबाव और सामाजिक मेलजोल में कमी जैसे कारण मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहे हैं।
इहबास (IHBAS) अस्पताल के मनोचिकित्सा विभाग के प्रोफेसर डॉ. ओम प्रकाश का कहना है कि मानसिक स्वास्थ्य के प्रति उपेक्षा की प्रवृत्ति अब भी बनी हुई है और यही सबसे बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि जब तक मानसिक स्वास्थ्य को शारीरिक स्वास्थ्य जितनी प्राथमिकता नहीं दी जाएगी, तब तक इस बढ़ती समस्या पर नियंत्रण मुश्किल है।
देश में हुए 2016 के नेशनल मेंटल हेल्थ सर्वे के अनुसार, भारत में हर दसवां व्यक्ति मानसिक रोग से पीड़ित था। विशेषज्ञों का अनुमान है कि अब यह संख्या और भी अधिक हो सकती है। एम्स के मनोचिकित्सा विभाग के प्रमुख प्रो. प्रताप शरण ने बताया कि दिल्ली एम्स में हर साल लगभग एक लाख मरीज मानसिक रोगों का इलाज कराने आते हैं, जबकि रोज़ाना ओपीडी में करीब 300 से 400 मरीज आते हैं। एम्स में 32 बेड का एक समर्पित मानसिक रोग वार्ड है, जहां गंभीर मरीजों का इलाज किया जाता है।
डॉ. प्रताप शरण ने बताया कि एम्स अपने चार हजार मेडिकल छात्रों के लिए भी मेंटल हेल्थ काउंसलिंग की सुविधा उपलब्ध कराता है। इसके अलावा, कोविड काल में शुरू की गई टेली-काउंसलिंग सेवा भी अभी जारी है, जिससे मरीज ऑनलाइन परामर्श प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि मानसिक तनाव के इलाज में दवाओं के साथ योग और मेडिटेशन की भी अहम भूमिका होती है।
सफदरजंग अस्पताल में भी मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में बड़ी सुविधाएं उपलब्ध हैं। यहां के मनोचिकित्सा विभागाध्यक्ष प्रो. पंकज वर्मा ने बताया कि अस्पताल में प्रतिदिन 250 से 350 मरीज ओपीडी में आते हैं। सोमवार को नशा मुक्ति ओपीडी, बुधवार को चाइल्ड गाइडेंस और ऑटिज्म ओपीडी, और शुक्रवार को साइको-सेक्सुअल ओपीडी चलाई जाती है। सफदरजंग अस्पताल में आधुनिक ईडीएमएस (EDMS) और आरटीएमएस (rTMS) तकनीकें भी शुरू की गई हैं, जिनसे बिना दर्द के ब्रेन को हल्के करंट के जरिए स्टिम्युलेट करके इलाज किया जाता है।
आरएमएल अस्पताल के प्रोफेसर डॉ. लोकेश के अनुसार, यहां रोज़ाना 200 से 300 मरीज मानसिक रोगों के इलाज के लिए आते हैं। अस्पताल के साइकेट्री विभाग के साथ क्लिनिकल साइकोलॉजी और सोशल वेलफेयर डिपार्टमेंट मिलकर मरीजों का समग्र इलाज करते हैं। दवाओं के साथ-साथ काउंसलिंग और मोटिवेशन सेशन के जरिए मरीजों को ठीक किया जाता है।
दिल्ली सरकार के अंतर्गत आने वाला इहबास (IHBAS) देश का सबसे बड़ा मानसिक रोगों का अस्पताल है। यहां प्रतिदिन लगभग 1500 मरीज ओपीडी में इलाज करवाते हैं, और सालाना तीन से चार लाख मरीज अस्पताल की सेवाओं का लाभ लेते हैं। अस्पताल के निदेशक प्रो. डॉ. राजेंद्र कुमार धमीजा ने बताया कि इहबास की टेली-मानस हेल्पलाइन (14416) देशभर में मानसिक स्वास्थ्य सहायता को सुलभ बनाने में अहम भूमिका निभा रही है।
टेली-मानस हेल्पलाइन पर सबसे अधिक कॉल डिप्रेशन, चिंता, नींद की कमी और नशे की लत से संबंधित आती हैं। प्रशिक्षित विशेषज्ञ मरीजों को तुरंत परामर्श देते हैं और ज़रूरत पड़ने पर उन्हें निकटतम अस्पताल से जोड़ते हैं। यह सेवा ग्रामीण और दूरदराज़ इलाकों तक मानसिक स्वास्थ्य सहायता पहुंचाने में एक मील का पत्थर साबित हो रही है।
डॉ. ओम प्रकाश ने बताया कि मानसिक बीमारियों के शुरुआती लक्षणों में नींद और भूख में बदलाव, चिड़चिड़ापन, थकान, ध्यान की कमी और सामाजिक दूरी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ये लक्षण सामान्य लग सकते हैं, लेकिन इन्हें नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है। समय रहते इलाज और काउंसलिंग से गंभीर मानसिक विकारों से बचा जा सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर समाज में जागरूकता बढ़ रही है, लेकिन उपचार की सुविधाएं और प्रशिक्षित विशेषज्ञों की संख्या को बढ़ाना जरूरी है ताकि हर व्यक्ति को समय पर सही इलाज मिल सके।